सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची 'सितारे ज़मीन पर' की गूंज, समय रैना को डिस्लेक्सिक व्यक्तियों को शो पर होस्ट करने का दिया आदेश
2007 में रिलीज़ हुई 'तारे जमीन पर' ने सच में समाज का ध्यान इस बात पर खींचा कि बच्चों में डिस्लेक्सिया के बारे में जागरूकता बढ़ाना कितना ज़रूरी है। फिल्म ने बड़ी चर्चा पैदा की थी, और इसी कहानी को आगे बढ़ाते हुए इस साल रिलीज हुई आमिर खान की 'सितारे जमीन पर' ने डिस्लेक्सिक वाले लोगों के बारे में जागरूकता फैलाने जैसे बड़े मुद्दे पर फोकस किया है।
तारे जमीन पर एक ऐसी फिल्म थी जिसने समाज पर गहरा असर डाला था, और सितारे ज़मीन पर ने भी वही किया है, इतना गहरा असर छोड़ा है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को डिस्लेक्सिक वाले लोगों को अपने प्लेटफॉर्म पर जगह देने का आदेश तक दे दिया है।
सच्चा सिनेमा वही होता है जो समाज पर असर छोड़े, और सितारे ज़मीन पर ने ये बात पूरी तरह साबित कर दी है। समय रैना वाले फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें और चार अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को आदेश दिया है कि वे महीने में कम से कम दो बार अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और पब्लिक इवेंट्स में डिस्लेक्सिक वाले लोगों को जगह दें, ताकि स्पाइनल मस्क्युलर एट्रॉफी जैसे दुर्लभ रोगों से जूझ रहे बच्चों के लिए जागरूकता और फंड जुटाया जा सके।
कोर्ट का कहना है कि यह कदम विवाद को एक सकारात्मक काम में बदलने के लिए उठाया गया है, क्योंकि उन्होंने उस वीडियो को गंभीरता से लिया था जिसमें कॉमेडियंस ने डिस्लेक्सिक लोगों का मज़ाक उड़ाया था। यह कदम सुप्रीम कोर्ट की ओर से बिना किसी शक के बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला है, और सितारे ज़मीन पर ने इस मुद्दे को लोगों की चर्चा में लाने में एक अहम भूमिका निभाई है।
फिल्म 'सितारे जमीन पर' में आमिर ख़ान प्रोडक्शंस ने गर्व के साथ 10 उभरते सितारों को पेश किया है, जिसमें आरूष दत्ता, गोपी कृष्ण वर्मा, समय देसाई, वेदांत शर्मा, आयुष भंसाली, आशीष पेंडसे, ऋषि शहानी, ऋषभ जैन, नमन मिश्रा और सिमरन मंगेशकर का नाम शामिल है। इस फिल्म का निर्देशन आर. एस. प्रसन्ना ने किया है।