बांग्लादेश विवाद पर शाहरुख खान पर गद्दारी का आरोप, अभिनेता के समर्थन में उतरे मौलाना
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचार को लेकर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर का बयान इन दिनों चर्चा में है। इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने फिल्म अभिनेता शाहरुख खान को भी निशाने पर लिया। देवकीनंदन ठाकुर ने आईपीएल में बांग्लादेश के क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को मोटी रकम में खरीदे जाने पर सवाल खड़े किए और इसे देशहित के खिलाफ करार दिया।
शाहरुख खान पर लगाए गए गंभीर आरोप
देवकीनंदन ठाकुर के बयान के बाद यह मामला और तूल पकड़ गया, जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भी शाहरुख खान पर निशाना साधते हुए कहा कि अभिनेता गद्दारों जैसे काम कर रहे हैं। इन बयानों के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई और सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
शाहरुख खान के समर्थन में उतरे मौलाना
इस पूरे विवाद के बीच कई मुस्लिम धर्मगुरु शाहरुख खान के समर्थन में सामने आए हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि देवकीनंदन ठाकुर और संगीत सोम जैसे नेताओं को यह समझना चाहिए कि भारतीय मुस्लिम भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों से चिंतित हैं और उनकी सुरक्षा का समर्थन करते हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर शाहरुख खान किसी क्रिकेटर के साथ व्यावसायिक समझौता करते हैं, तो उसे किसी भी हाल में गद्दारी नहीं कहा जा सकता। इस तरह के आरोप पूरी तरह अनुचित हैं।
इमाम एसोसिएशन का बयान
इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में बिना सोचे-समझे और संविधान को समझे बिना विरोध करना एक आदत बन चुकी है। जब भी किसी मुस्लिम का नाम सामने आता है, तो विरोध और आरोप लगाना और आसान हो जाता है।
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि शाहरुख खान मुस्लिम हैं और जिस बांग्लादेशी क्रिकेटर को उन्होंने अपनी टीम में शामिल किया है, वह भी मुस्लिम है, इसलिए नफरत भरी प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से सामने आ जाती है। अगर किसी ने संविधान के खिलाफ कुछ किया है, तो कानून और सरकार कार्रवाई करेगी। किसी को भी व्यक्तिगत तौर पर यह तय करने का अधिकार नहीं है कि शाहरुख खान को क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
बयानबाजी से गरमाया माहौल
शाहरुख खान को लेकर दिए गए बयानों के बाद यह साफ हो गया है कि मामला अब सिर्फ फिल्म या क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक और राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयान सामने आ सकते हैं, जिससे विवाद और गहराने की संभावना है।