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Written By WD Feature Desk
Last Updated : शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 (09:35 IST)

Netaji Birthday: आईसीएस की नौकरी छोड़ नेताजी कैसे बने आजाद हिन्द फौज के नायक?

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का चित्र
Subhash Chandra Bose Biography: नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक, उड़ीसा में हुआ था। वे एक सम्पन्न बंगाली परिवार से थे। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभाभती देवी था। सुभाष चंद्र बोस ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कटक से की। फिर उन्होंने कालेजिएट स्कूल कोलकाता में पढ़ाई की और बाद में प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया। इसके बाद, इंग्लैंड में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। नेताजी के पिता चाहते थे कि वे सिविल सेवा में जाएं। उन्होंने 1920 में इंग्लैंड में भारतीय सिविल सेवा/ ICS की कठिन परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया, लेकिन अंग्रेजों की गुलामी न करने के लिए 1921 में इस्तीफा दे दिया।
 
  1. सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय
  2. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
  3. आजाद हिंद फौज की स्थापना
  4. सुभाष चंद्र बोस का निधन
  5. सुभाष चंद्र बोस जयंती- FAQs
आइए यहां जानते हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में...
 

1. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान 


1920 के दशक में, सुभाष चंद्र बोस ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़कर स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। वे गांधीजी के विचारों के समर्थक थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने उनके अहिंसक मार्ग से अलग होकर हिंसक क्रांति का रास्ता अपनाया। 1939 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, लेकिन पार्टी के भीतर गांधीजी के विरोध के कारण उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा।

2. आजाद हिंद फौज

आईसीएस में चयन के बावजूद नेताजी का मन ब्रिटिश सरकार की सेवा में नहीं लगा। उस समय ICS अंग्रेज़ी हुकूमत की सबसे ऊंची और प्रभावशाली नौकरी मानी जाती थी। वे भारतीयों पर हो रहे अत्याचारों से आहत थे तथा महात्मा गांधी और स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित थे इसी कारण उन्होंने 1921 में ICS से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला उस दौर में बेहद साहसिक माना गया। 
 
भारत लौटने के बाद नेताजी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़कर आंदोलन तेज किया, तथा जवाहरलाल नेहरू और चित्तरंजन दास के साथ काम किया, हालांकि ब्रिटिश सरकार के खिलाफ उनके आक्रामक रुख के कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। नेताजी ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान महसूस किया कि केवल अहिंसा से आज़ादी संभव नहीं है। अत: वे गुप्त रूप से भारत से बाहर गए और जर्मनी और जापान की मदद से आज़ाद हिन्द फौज का पुनर्गठन किया। और आज़ाद हिन्द फौज का गठन इतिहास रचने वाला कदम साबित हुआ।
 
सुभाष चंद्र बोस ने 1942 में आजाद हिंद फौज की स्थापना की। इस सेना का उद्देश्य अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष करना था। उन्होंने जापान और जर्मनी के समर्थन से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। भले ही द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद आजाद हिंद फौज को पीछे हटना पड़ा और उसके सैनिकों पर लाल किले में मुकदमा चला, लेकिन इस फौज ने ब्रिटिश शासन की जड़ें हिला दी थीं। 
 
आजाद हिंद फौज के तीन मुख्य आधार स्तंभ थे: एकता, विश्वास और बलिदान। सुभाष चंद्र बोस के प्रसिद्ध नारे- 'जय हिंद', 'चलो दिल्ली' और 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा'। आजाद हिंद फौज ने जापानी सेना के साथ मिलकर इम्फाल और कोहिमा में अंग्रेजों के खिलाफ भीषण युद्ध लड़ा। इसने भारतीय सैनिकों के मन से अंग्रेजों का डर खत्म कर दिया, जो अंततः 1947 की आजादी का एक प्रमुख कारण बना।

3. सुभाष चंद्र बोस का निधन 

सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को एक हवाई दुर्घटना में हुई, लेकिन उनकी मृत्यु के बारे में आज भी कई सवाल बने हुए हैं। उनका निधन ताइवान में हुआ था, लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि वे वहां मारे नहीं गए थे, बल्कि बाद में गुमनाम होकर रहे थे।
 

सुभाष चंद्र बोस जयंती- FAQs

प्रश्न 1. वर्ष 2026 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कौन सी जयंती मनाई जाएगी? 
 
उत्तर: वर्ष 2026 में नेताजी की 129वीं जयंती मनाई जाएगी।
 
प्रश्न 2. पराक्रम दिवस क्या है? 
 
उत्तर: भारत सरकार ने नेताजी के अदम्य साहस और उनकी राष्ट्र सेवा को सम्मान देने के लिए 2021 में उनकी जयंती पर 23 जनवरी को 'पराक्रम दिवस' घोषित किया था।
 
प्रश्न 3. नेताजी ने 'आजाद हिंद फौज' की कमान कब संभाली? 
 
उत्तर: नेताजी जुलाई 1943 में सिंगापुर पहुंचे और रासबिहारी बोस ने फौज की कमान उन्हें सौंपी। उन्होंने ही 'दिल्ली चलो' का प्रसिद्ध नारा दिया था।
 
प्रश्न 4. सुभाष चंद्र बोस के राजनीतिक और आध्यात्मिक गुरु कौन थे? 
 
उत्तर: वे स्वामी विवेकानंद को अपना आध्यात्मिक गुरु और चितरंजन दास देशबंधु को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।
 
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