''ये सरकार कायर है''
- रूपा झा (दिल्ली)
BBC
इरोम शर्मिला ग्यारह सालों से इम्फाल के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में आत्महत्या के आरोप में बंदी है। वे 1958 में पारित सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून को हटाए जाने की मांग करते हुए भूख हड़ताल पर हैं। उनसे मिलना काफी मुश्किल है। तीन महीनों तक लगातार कोशिश करने के बावजूद मुलाकात नहीं हो पाई। उन तक बीबीसी ने अपने सवाल जरूर पहुंचाए और उन्होंने हाथ से लिखकर अपना जवाब भेजा। सवाल-जवाब का मुख्य अंश यहां प्रस्तुत है:
*आप पिछले 10 सालों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून के विरोध में भूख हड़ताल पर हैं। इतना लंबा अरसा बीत गया है क्या आपको लगता है कि कभी आपकी मांग पूरी होगी?
- मुझे सच पर विश्वास है। सच की ही अंत में जीत होती है। और इस तक पंहुचने के लिए मैं अवधि पर ध्यान नहीं देती हूं।
*आपको लगता है कि आपके विरोध का तरीका सही है?
-जी हां, बिल्कुल। मैं अपने तरीके से बिल्कुल संतुष्ट हूं और इसे सही मानती हूं। अहिंसावादी तरीके का कोई विकल्प नहीं है क्योंकि इससे किसी और को नुकसान नहीं हुआ है। मैं इस कठोर कानून के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ रही हूं जिसे एक बेहद कायर सरकार ने लागू किया है।
*क्या आपको नहीं लगता कि भारत सरकार को पृथकतावादी आंदोलन से मुकाबला करने के लिए एक मजबूत कानून की जरूरत है?
- किसी भी देश में पृथकतावादी आंदोलन इसीलिए पनपते हैं क्योंकि वहां अच्छे शासन की कमी होती है। ये उस प्रशासन की पूरी तरह से विफलता समझी जानी चाहिए। पृथकतावादी आंदोलनों से मुकाबला करने के लिए केवल तानाशाहों को ऐसे कठोर कानूनों की जरूरत होती है। जो विद्रोही गुट हैं वो भी इसी देश का हिस्सा हैं। उनकी बात को समझने की जरूरत है। मेरा विश्वास है कि प्यार और बातचीत से हर रास्ता निकल सकता है।
*आप कब तक भूख हड़ताल पर रहेंगी?
- मैं कुछ नहीं कह सकती, लेकिन इतना कह सकती हूं कि जब तक मेरी मांग पूरी नहीं हो जाती मैं भूख हड़ताल पर ही रहूंगी। पिछले दस सालों में मैंने अपने मुंह में एक दाना या एक बूंद पानी नहीं गया है। हां जबरदस्ती मुझे नाक के जरिए जरूर फीड करते हैं। मैं दांत भी रूई के फाए से रगड़ कर साफ करती हूं कि मेरा प्रण न टूटे। मैंने दस सालों से अपनी मां से भी मुलाकात नहीं की है क्योंकि मैं अपने लक्ष्य को पाकर ही उनका मुंह देखूंगी।
*आपको मौत से डर नहीं लगता?
- मेरे लिए मौत सजा नहीं है।
*क्या आपको गुस्सा आता है कि अभी तक सरकार ने आपकी बात नहीं मानी है?
- मेरी लड़ाई की शुरुआत से ही मैं सरकार के नकारात्मक रवैए से परिचित हूं। मैंने कई बार अपने मुख्यमंत्री से मुलाकात की है। हर बार मेरे हर सवाल पर वे यही कहते रहे हैं कि केंद्र ने मनाकर दिया है। ये सिर्फ इस बात को दर्शाता है कि वे एक लोकतांत्रिक नेता के रूप में अपने मासूम लोगों की फिक्र नहीं करते हैं। उनकी पूरी चिंता केवल अपनी कुर्सी को बचाने की होती है।

