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Last Modified: बुधवार, 15 अप्रैल 2026 (14:27 IST)

आज खरीदार इलेक्ट्रिक कारों की ओर स्विच करने से क्यों हिचकते हैं?

electric car
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है। नई तकनीक, कम रनिंग कॉस्ट और पर्यावरण के प्रति जागरूकता जैसे कई कारण EVs को आकर्षक बनाते हैं। फिर भी, बड़ी संख्या में खरीदार अभी भी पारंपरिक पेट्रोल या डीजल कारों (ICE) को ही चुन रहे हैं।
 
यह सवाल महत्वपूर्ण है—जब फायदे स्पष्ट हैं, तो फिर लोग EVs की ओर पूरी तरह क्यों नहीं बढ़ रहे? इसका जवाब कई व्यावहारिक और मनोवैज्ञानिक कारणों में छिपा है।
 

परिचित तकनीक का भरोसा

सबसे बड़ा कारण है परिचित तकनीक पर भरोसा।
पेट्रोल और डीजल कारें दशकों से इस्तेमाल हो रही हैं। खरीदार जानते हैं:
  • इनकी मेंटेनेंस कैसी होती है
  • फ्यूल कहां मिलेगा
  • लंबी दूरी पर इनका व्यवहार कैसा रहेगा
 
Hyundai Venue जैसी कारें इस भरोसे का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहां परफॉर्मेंस और उपयोग का अनुभव पहले से जाना-पहचाना होता है । इसके मुकाबले EVs नई तकनीक हैं, जिससे कई खरीदार अभी पूरी तरह सहज नहीं हैं।
 

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की चिंता

EV अपनाने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है चार्जिंग की उपलब्धता।
जहां पेट्रोल पंप आसानी से हर जगह मिल जाते हैं, वहीं EV चार्जिंग नेटवर्क अभी विकसित हो रहा है। हालांकि सुधार हो रहा है, लेकिन अभी भी कई खरीदारों को यह चिंता रहती है:
  • लंबी यात्रा में चार्जिंग कहां मिलेगी
  • चार्जिंग में कितना समय लगेगा
Hyundai Creta Electric जैसे मॉडल में फास्ट चार्जिंग विकल्प (करीब 58 मिनट में 10% से 80%) उपलब्ध है, फिर भी इंफ्रास्ट्रक्चर की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
 

रेंज एंग्जायटी (Range Anxiety)

EV खरीदते समय एक आम डर होता है—बैटरी खत्म होने का डर।
भले ही Creta Electric जैसी कारें लगभग 510 km तक की रेंज देती हैं, फिर भी कई खरीदारों को चिंता
रहती है:
  • अगर रास्ते में चार्ज खत्म हो जाए तो क्या होगा
  • क्या वास्तविक परिस्थितियों में रेंज कम हो जाएगी
यह मनोवैज्ञानिक डर EV अपनाने की गति को धीमा करता है।
 

शुरुआती कीमत (Upfront Cost)

EVs की शुरुआती कीमत आमतौर पर ICE कारों से ज्यादा होती है।
 
भले ही:
  • EV की रनिंग कॉस्ट कम हो
  • मेंटेनेंस कम हो
लेकिन खरीदार अक्सर पहले निवेश (initial cost) पर ज्यादा ध्यान देते हैं। इसी वजह से कई लोग ICE
कार को ज्यादा “किफायती” विकल्प मानते हैं।
 

नई तकनीक को लेकर अनिश्चितता

EVs के साथ एक और चुनौती है—नई तकनीक को लेकर अनिश्चितता।
खरीदार सोचते हैं:
  • बैटरी कितने साल चलेगी
  • रिप्लेसमेंट का खर्च कितना होगा
  • टेक्नोलॉजी कितनी जल्दी पुरानी हो जाएगी
हालांकि अब बैटरी पर लंबे समय की वारंटी (जैसे 8 साल तक) दी जा रही है, फिर भी यह चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
 

ड्राइविंग आदतों में बदलाव

EV चलाने का अनुभव ICE कार से अलग होता है।
EV में:
  • गियर नहीं होते
  • पावर डिलीवरी तुरंत होती है
  • रिजनरेटिव ब्रेकिंग होती है
यह बदलाव कुछ लोगों के लिए नया और अलग होता है। जो लोग पारंपरिक ड्राइविंग अनुभव के आदी हैं, उन्हें इस बदलाव को अपनाने में समय लगता है।
 

चार्जिंग समय बनाम फ्यूल भरना

ICE कार में:
  • 5 मिनट में फ्यूल भर जाता है
EV में:
  • चार्जिंग में समय लगता है
भले ही फास्ट चार्जिंग उपलब्ध हो, लेकिन यह समय अंतर कई खरीदारों को सोचने पर मजबूर करता है, खासकर उन लोगों को जो जल्दी और बिना रुकावट के सफर करना चाहते हैं।
 

उपयोग के आधार पर निर्णय

हर खरीदार की जरूरत अलग होती है।
EV ज्यादा उपयुक्त होती हैं:
  • शहर में रोज़ाना चलाने के लिए
  • तय दूरी के कम्यूट के लिए
जबकि ICE कार बेहतर लगती हैं:
  • लंबी दूरी की यात्रा के लिए
  • अनिश्चित उपयोग के लिए
इसलिए कई खरीदार अपनी जरूरत के हिसाब से ICE को अभी भी बेहतर विकल्प मानते हैं।

जानकारी की कमी

EVs के बारे में सही जानकारी का अभाव भी एक बड़ा कारण है।
कई लोग:
  • चार्जिंग सिस्टम को ठीक से नहीं समझते
  • वास्तविक लागत का आकलन नहीं कर पाते
  • फीचर्स और तकनीक को लेकर भ्रमित रहते हैं
ऐसे में ऑनलाइन कार खरीदने वाले प्लेटफॉर्म, जैसे ACKO Drive, खरीदारों को EV और ICE दोनों
विकल्पों को समझने में मदद करते हैं।
 

भविष्य बनाम वर्तमान का संतुलन

अंत में, यह निर्णय “आज” और “भविष्य” के बीच संतुलन का होता है।
  • ICE कार: भरोसेमंद और तुरंत उपयोगी
  • EV: भविष्य के लिए बेहतर और तकनीकी रूप से उन्नत
हर खरीदार को तय करना होता है कि वह किसे प्राथमिकता देता है।
 

निष्कर्ष

इलेक्ट्रिक कारों के फायदे स्पष्ट हैं, लेकिन चुनौतियाँ भी वास्तविक हैं। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, शुरुआती लागत, और नई तकनीक को लेकर अनिश्चितता जैसे कारण आज भी कई खरीदारों को EV अपनाने से रोकते हैं। हालांकि जैसे-जैसे तकनीक बेहतर होगी और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, यह अंतर धीरे-धीरे कम होगा। तब शायद EV सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि मुख्यधारा बन जाएंगी। फिलहाल, यह बदलाव एक यात्रा है—और हर खरीदार अपने समय के अनुसार इसमें शामिल हो रहा है।
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