कविता : स्वयं गढ़ना है मुझे स्वयं गढ़ना है मुझे हाथों में अपनी सुरेखाएं,भूल कर अवसाद तय करना है प्रगति की दिशाएं, कामना है मन में और मस्तिष्क में वह ...