आज के मुहूर्त (2.10.2010)
शनिवार, 2 अक्टूबर 2010
आज आपका दिन मंगलमयी रहे यही शुभकामना है। वेबदुनिया प्रस्तुत कर रही है खास आपके लिए आज के दिन के विशिष्ट मुहूर्त। अगर आप आज वाहन खरीदने का विचार कर रहे हैं या आज कोई नया व्यापार आरंभ करने जा रहे हैं तो आज के शुभ मुहूर्त में ही कार्य करें ताकि आपके कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
ज्योतिष एवं धर्म की दृष्टि से इन मुहूर्त का विशेष महत्व है। मुहूर्त और चौघड़िए के आधार पर वेबदुनिया आपके लिए प्रतिदिन के खास मुहूर्त की सौगात लेकर आई है।
प्रस्तुत है आज के मुहूर्त
शुभ विक्रम संवत- 2067, शालिवाहन शक संवत- 1932, संवत्सर का नाम- शोभन, अयन- दक्षिणायन, ऋतु- शरद, मास- आश्विन, पक्ष- कृष्ण, तिथि- नवमी, सायं 7.10 पश्चात दशमी, हिजरी सन्- 1431, मु. मास- शव्वाल, तारीख- 23, नक्षत्र- पुनर्वसु सायं 7.19 पश्चात पुष्य, योग- परिध प्रातः 10.53 पश्चात शिव, सूर्योदयकालीन करण- तैतिल, चन्द्रमा- कर्क राशि में दिन में 1.36 पर प्रवेश करेंगे।
ग्रह योग- श्राद्ध पक्ष जारी है।
दिन- सामान्य।
दिशाशूल- पूर्व दिशा में।
कार्य की अनुकूलता के लिए- रस पदार्थ का दान करें।
दिन का पर्व- गाँधी जयंती, नवमी श्राद्ध, सौभाग्यवती का श्राद्ध, बुढ़िया नवमी।
उपयोगी ज्ञान- सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या को किया जा सकता है।
शुभ समय- दिन 11.46-12.40, सायं 4.17-5.19। श्राद्ध का समय दिन 11.46-1.58।
सुझाव- यदि जरूरी नहीं हो तो प्रातः 9.17-10.46 के बीच मंगल कार्य टालें।
ज्योतिष एवं धर्म की दृष्टि से इन मुहूर्त का विशेष महत्व है। मुहूर्त और चौघड़िए के आधार पर वेबदुनिया आपके लिए प्रतिदिन के खास मुहूर्त की सौगात लेकर आई है।
प्रस्तुत है आज के मुहूर्त
शुभ विक्रम संवत- 2067, शालिवाहन शक संवत- 1932, संवत्सर का नाम- शोभन, अयन- दक्षिणायन, ऋतु- शरद, मास- आश्विन, पक्ष- कृष्ण, तिथि- नवमी, सायं 7.10 पश्चात दशमी, हिजरी सन्- 1431, मु. मास- शव्वाल, तारीख- 23, नक्षत्र- पुनर्वसु सायं 7.19 पश्चात पुष्य, योग- परिध प्रातः 10.53 पश्चात शिव, सूर्योदयकालीन करण- तैतिल, चन्द्रमा- कर्क राशि में दिन में 1.36 पर प्रवेश करेंगे।
ग्रह योग- श्राद्ध पक्ष जारी है।
दिन- सामान्य।
दिशाशूल- पूर्व दिशा में।
कार्य की अनुकूलता के लिए- रस पदार्थ का दान करें।
दिन का पर्व- गाँधी जयंती, नवमी श्राद्ध, सौभाग्यवती का श्राद्ध, बुढ़िया नवमी।
उपयोगी ज्ञान- सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या को किया जा सकता है।
शुभ समय- दिन 11.46-12.40, सायं 4.17-5.19। श्राद्ध का समय दिन 11.46-1.58।
सुझाव- यदि जरूरी नहीं हो तो प्रातः 9.17-10.46 के बीच मंगल कार्य टालें।

