आज के मुहूर्त (1.10.2010)
शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2010
आज आपका दिन मंगलमयी रहे यही शुभकामना है। वेबदुनिया प्रस्तुत कर रही है खास आपके लिए आज के दिन के विशिष्ट मुहूर्त। अगर आप आज वाहन खरीदने का विचार कर रहे हैं या आज कोई नया व्यापार आरंभ करने जा रहे हैं तो आज के शुभ मुहूर्त में ही कार्य करें ताकि आपके कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
ज्योतिष एवं धर्म की दृष्टि से इन मुहूर्त का विशेष महत्व है। मुहूर्त और चौघड़िए के आधार पर वेबदुनिया आपके लिए प्रतिदिन के खास मुहूर्त की सौगात लेकर आई है।
प्रस्तुत है आज के मुहूर्त
शुभ विक्रम संवत- 2067, शालिवाहन शक संवत- 1932, संवत्सर का नाम- शोभन, अयन- दक्षिणायन, ऋतु- शरद, मास- आश्विन, पक्ष- कृष्ण, तिथि- अष्टमी रात्रि 08.28 पश्चात नवमी, हिजरी सन्- 1431, मु. मास- शव्वाल, तारीख- 22, नक्षत्र- आर्द्रा रात्रि 08.13 पश्चात पुनर्वसु, योग- वरियान दिन 01.08 पश्चात शिव, सूर्योदयकालीन करण- बालव, चन्द्रमा- मिथुन राशि में दिवसपर्यंत रहेंगे।
ग्रह योग- पितृपक्ष जारी है।
दिन- सामान्य।
दिन का पर्व- अष्टमी श्राद्ध, अशोकाष्टमी, जीवित्पुत्रिका व्रत।
दिशाशूल- पश्चिम दिशा में।
उपयोगी ज्ञान- पंचक में आभूषण या नवीन वस्त्र धारण करने का मुहूर्त शुभ फलदायी होता है।
कार्य की अनुकूलता के लिए- धातु के पात्र में अन्न रखकर दान करें।
शुभ समय- प्रात: 07.06-08.10, दिन 02.00-03.16। श्राद्ध का समय दिन 12.15 से 02.22 तक।
सुझाव- यदि जरूरी नहीं हो तो दिन 10.46-12.15 के बीच शुभ कार्य टालें।
ज्योतिष एवं धर्म की दृष्टि से इन मुहूर्त का विशेष महत्व है। मुहूर्त और चौघड़िए के आधार पर वेबदुनिया आपके लिए प्रतिदिन के खास मुहूर्त की सौगात लेकर आई है।
प्रस्तुत है आज के मुहूर्त
शुभ विक्रम संवत- 2067, शालिवाहन शक संवत- 1932, संवत्सर का नाम- शोभन, अयन- दक्षिणायन, ऋतु- शरद, मास- आश्विन, पक्ष- कृष्ण, तिथि- अष्टमी रात्रि 08.28 पश्चात नवमी, हिजरी सन्- 1431, मु. मास- शव्वाल, तारीख- 22, नक्षत्र- आर्द्रा रात्रि 08.13 पश्चात पुनर्वसु, योग- वरियान दिन 01.08 पश्चात शिव, सूर्योदयकालीन करण- बालव, चन्द्रमा- मिथुन राशि में दिवसपर्यंत रहेंगे।
ग्रह योग- पितृपक्ष जारी है।
दिन- सामान्य।
दिन का पर्व- अष्टमी श्राद्ध, अशोकाष्टमी, जीवित्पुत्रिका व्रत।
दिशाशूल- पश्चिम दिशा में।
उपयोगी ज्ञान- पंचक में आभूषण या नवीन वस्त्र धारण करने का मुहूर्त शुभ फलदायी होता है।
कार्य की अनुकूलता के लिए- धातु के पात्र में अन्न रखकर दान करें।
शुभ समय- प्रात: 07.06-08.10, दिन 02.00-03.16। श्राद्ध का समय दिन 12.15 से 02.22 तक।
सुझाव- यदि जरूरी नहीं हो तो दिन 10.46-12.15 के बीच शुभ कार्य टालें।

