प्रीति योग में करें प्रेम विवाह, होगा सफल और कौन से कार्य कर सकते हैं, जानिए

अनिरुद्ध जोशी|
शुभ मुहूर्त या योग को लेकर मुहूर्त मार्तण्ड, मुहूर्त गणपति, मुहूर्त चिंतामणि, मुहूर्त पारिजात, धर्म सिंधु, निर्णय सिंधु आदि शास्त्र हैं। हिन्दू पंचांग में मुख्य 5 बातों का ध्यान रखा जाता है। इन पांचों के आधार पर ही कैलेंडर विकसित होता है। ये 5 बातें हैं- 1. तिथि, 2. वार, 3. नक्षत्र, 4. योग और 5. करण। इन्हीं में से एक है योग।

योग कई प्रकार के होते हैं जैसे अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, गुरु-पुष्य योग, पुष्कर योग, त्रिपुष्कर, द्विपुष्कर योग आदि। उसी प्रकार एक योग होता है प्रीति योग। आओ जानते हैं ये योग क्या होता है और इसमें क्या कार्य करना चाहिए।

क्या होता है प्रीति योग:- जैसा कि इसका नाम है प्र‍ीति योग इसका अर्थ यह है कि यह योग परस्पर प्रेम का विस्तार करता है। के स्वामी विष्णु है।

प्रीति योग में कौनसे कार्य करें:-

1. सौभाग्य योग सदा मंगल करने वाला होता है। नाम के अनुरूप यह भाग्य को बढ़ाने वाला है। इस योग में की गई शादी से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। इसीलिए इस मंगल दायक योग भी कहते हैं। लोग मुहूर्त तो निकलवा लेते हैं परंतु सही योग के समय में प्रणय सूत्र में नहीं बंध पाते। अत: सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए सौभाग्य योग में ही विवाह के बंधन में बंधने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

2. यदि विवाह के समय सही लग्न, मुहूर्त आदि नहीं है और सौभाग्य योग भी नहीं है तो प्रति योग में विवाह करना शुभ माना जाता है। कहते भी है कि कि प्रीति संबंध करना। प्रेम विवाह करने में अक्सर इस योग का ध्यान रखा जाता है।

3. अक्सर मेल-मिलाप बढ़ाने तथा अपने रूठे मित्रों एवं संबंधियों को मनाने के लिए प्रीति योग में ही प्रयास करने से सफलता मिलती है।

4. झगड़े निपटाने या समझौता करने के लिए भी यह योग शुभ होता है।

5. इस योग में किए गए कार्य से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।

विशेष : प्रीति योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति विषयों को जानने वाला, जिन्दादिल और किसी भी काम को उत्साह पूर्वक करने वाला होता है। प्रीती योग के जातक सौन्दर्य प्रेमी होने के साथ ही चालाक और स्वार्थ सिद्ध करने वाले भी होते हैं।



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