ओड़िसा के पंचसखा में से एक संत हुए अच्युतानंद दास (1480 और 1505), जिन्होंने कई किताबें लिखी हैं। वर्तमान में उनकी लिखी पुस्तक 'भविष्य मालिका' बहुत चर्चा में है। इसी तरह के एक संत आंध्रप्रदेश में भी हुए हैं जिनका नाम श्री पोतुलूरी वीर ब्रह्मेंद्र स्वामी (1608–1694) हैं, उन्होंने भविष्यवाणियों पर एक ग्रंथ लिखा है जिसका नाम है- 'कालज्ञानम्'। इस ग्रंथ में भी उसी तरह की भविष्यवाणी है जिस तरह की भविष्यवाणियां भविष्य मालिका में है। ब्रह्मेंद्र स्वामी को "दक्षिण का नास्त्रेदमस'' भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक में भविष्य की हजारों ऐसी भविष्यवाणियां कर रखी हैं, जिनमें से कई आज सच साबित होने का दावा किया जा रहा है।
ग्रंथ का परिचय और इतिहास
रचना और भाषा: यह ग्रंथ आंध्र प्रदेश की तेलुगु भाषा में लिखा गया है, जो मुख्य रूप से भविष्यवाणियों पर आधारित है।
संरक्षण: इस ग्रंथ को महान संत ब्रह्मेंद्र स्वामी ने ताड़ के पत्तों पर लिखा था। उन्होंने इसे एक पेड़ के नीचे सुरक्षित रख दिया था।
रहस्यमयी भविष्यवाणी: स्वामी जी ने यह भी बताया था कि आने वाले समय में इस ग्रंथ को किस तरह निकाला जाएगा और लोग इसकी भविष्यवाणियों को किस प्रकार पढ़ेंगे।
काल गणना और संवत्सर विधान
समय का चक्र: ज्योतिष के अनुसार 60 संवत्सरों का एक चक्र होता है। उत्तर भारतीय और तेलुगु कैलेंडर में इनके नाम और गणना अलग-अलग हो सकती है।
वर्तमान स्थिति: 19 मार्च 2026 से तेलुगु पंचांग के अनुसार 40वां 'श्री पराभव' संवत्सर शुरू हुआ है, जबकि विक्रम संवत के अनुसार यह 'रौद्र' संवत्सर है।
आगामी समय: 'पराभव' संवत्सर 6 अप्रैल 2027 तक रहेगा, जिसके बाद 'प्लवंग' नामक नया संवत्सर प्रारंभ होगा।
सटीक आधुनिक भविष्यवाणियां
स्वामी जी ने सदियों पहले आधुनिक तकनीक और सामाजिक बदलावों का संकेत दे दिया था:
तकनीकी विकास: बिना बैलों के गाड़ियां दौड़ेंगी (वाहन) और घरों में उजाले के लिए तेल के दीयों की जरूरत नहीं पड़ेगी (बिजली)।
हवाई मार्ग: आसमान में 'लोहे की चिड़ियां' (हवाई जहाज) उड़ेंगी। सीमाओं पर चिड़ियाएं हमला करेगी।
प्रकृति का प्रकोप: महामारियों से लाखों मौतें होंगी, हवा में प्रदूषण (जहर) होगा, आसमान से लाल बारिश होगी और समुद्र का जलस्तर बढ़ने से शहर डूब जाएंगे।
जलवायु परिवर्तन: धरती का तापमान बढ़ने से पहाड़ों से आग निकलेगी और आसमान में दो सूरज जैसे दृश्य नजर आएंगे।
कलयुग का अंत और भीषण संघर्ष
संधिकाल: कलयुग के 5000 वर्ष बीतने के बाद का समय 'संधिकाल' कहलाएगा। ग्रंथ के अनुसार 2025 से 2034 का कालखंड अत्यंत भयानक होगा।
महायुद्ध: मीन और मेष राशि के शनि के गोचर के दौरान भीषण विश्व युद्ध के संकेत हैं।
वैश्विक संघर्ष: अधर्म के अंत से पहले दुनिया को लगभग 108 वर्षों के लंबे संघर्ष और उथल-पुथल से गुजरना होगा।
अवतार और धर्म की पुनर्स्थापना
कल्कि अवतार: जब मानवता त्राहि-त्राहि करेगी, तब भगवान विष्णु 'वीरभोग वसंतराया' (कल्कि का एक रूप) के रूप में प्रकट होंगे।
अधर्म का नाश: वे अपनी तलवार से अधर्मियों का संहार करेंगे और पुनः पृथ्वी पर शांति व धर्म की स्थापना करेंगे।
सामाजिक और धार्मिक बदलाव
समानता: एक समय ऐसा आएगा जब ऊंच-नीच का भेद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और सभी वर्गों के लोग मंदिरों में पुजारी बनेंगे।
तिरुपति महिमा: तिरुपति बालाजी मंदिर की महिमा वैश्विक होगी और हर धर्म के लोग वहां दर्शन के लिए आएंगे।
सतयुग का उदय: 108 वर्षों के इस बड़े बदलाव और संघर्ष के बाद अंततः एक नए युग (सतयुग) की नींव पड़ेगी।
एक रोचक बात: स्वामी जी ने अपनी समाधि के बारे में कहा था कि जब पाप चरम पर होगा, तब उनकी समाधि से आवाज़ें आएंगी और वे धर्म की रक्षा के लिए फिर से मार्गदर्शन करेंगे। उनके भक्त मानते हैं कि वर्तमान में हो रही वैश्विक घटनाएं स्वामी जी के उसी 'कालज्ञानम्' का हिस्सा हैं।