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Written By WD Feature Desk
Last Updated : मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 (12:49 IST)

Dhanu Sankranti: धनु संक्रांति का महत्व और तर्पण के 10 प्रमुख फायदे

Surya Arghya and Mantra
Benefits of Dhanu Sankranti Tarpan: हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार आज, 16 दिसंबर 2025, दिन मंगलवार को सूर्य-धनु संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। धनु संक्रांति पर पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए तर्पण करना एक महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया है। यह न केवल पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर है, बल्कि यह आपके जीवन को धार्मिक पुण्य से भी भर देता है। इस दिन तर्पण विधि, पितृ पूजा, और सूर्य देवता की पूजा से न केवल पितृ दोष समाप्त होते हैं, बल्कि जीवन में खुशहाली और समृद्धि की प्राप्ति होती है।ALSO READ: Dhanu sankranti 2025: धनु संक्रांति कब है, क्या है इसका महत्व, पूजा विधि और कथा?
 
धनु संक्रांति का महत्व: धनु संक्रांति का दिन अपने पूर्वजों को याद करने, उन्हें धन्यवाद देने और उनके आशीर्वाद से जीवन को सफल बनाने का एक अत्यंत शुभ अवसर होता है। इस दिन खास तौर पर तर्पण करना पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने का एक तरीका है। जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यकारी है और पितृ दोष से मुक्ति पाने का एक प्रभावी उपाय माना जाता है। साथ ही य‍ह अवसर पितृ ऋण को समाप्त करने के लिए तर्पण और पितृ पूजा करने की परंपरा है।

धनु संक्रांति पर इस कार्य को विशेष रूप से किया जाता है ताकि पितृ ऋण से मुक्ति मिल सके। पितृ तर्पण करते समय मंत्र- 'ॐ पितृ देवाय नमः' का जाप किया जाता है, जिससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
 
धनु संक्रांति पर तर्पण करने के प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं:
 
1. पितरों की तृप्ति: इस दिन श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण सीधे पितरों/ पूर्वजों की आत्माओं को तृप्ति और शांति प्रदान करता है।
 
2. सूर्य देव को अर्घ्य और मंत्र जाप: धनु संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर, स्नान के बाद तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें। उसमें लाल चंदन, लाल फूल और थोड़ा गुड़ मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय जल की धार के बीच से सूर्य को देखें। अर्घ्य देते समय आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें या कम से कम 108 बार 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करें। यह उपाय सूर्य दोष को तुरंत शांत करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और समाज में मान-सम्मान दिलाता है।
 
3. बृहस्पति का आशीर्वाद: धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं, जो ज्ञान, समृद्धि और भाग्य के कारक हैं। उनके प्रभाव में किया गया धार्मिक कार्य या तर्पण भक्तों के ज्ञान, भाग्य और धन में वृद्धि करता है।
 
4. दोष निवारण: जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उन्हें इस दिन तर्पण करने से इस दोष के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है, जिससे घर-परिवार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
 
5. वंश का आशीर्वाद: जब पि‍तृदेव/ पितर संतुष्ट होते हैं, तो वे अपने वंशजों को सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, और संतान सुख का आशीर्वाद देते हैं, जिससे वंश की वृद्धि होती है।ALSO READ: Dhanur Sankranti 2025: धनु संक्रांति पर तर्पण: पितृ ऋण से मुक्ति पाने का एक महत्वपूर्ण अवसर
 
6. बाधाओं का अंत: तर्पण से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन के सभी क्षेत्रों, जैसे- करियर, विवाह, धन में आने वाली रुकावटें और बाधाएं समाप्त होती हैं।
 
7. इस पवित्र दिन पर तर्पण, दान और पूजा-पाठ करने से पितरों की आत्माओं को मोक्ष की प्राप्ति होती है और साधक को भी पुण्य की प्राप्ति होती है।
 
8. पाप मुक्ति: धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे परलोक में उत्तम स्थान मिलता है।
 
9. ऋण मुक्ति: यह पूजन भक्तों को अपने पूर्वजों के प्रति अपने कर्तव्य को पूरा करने में मदद करती है, जिससे वे पितृ ऋण से मुक्त होते हैं।
 
10. सूर्य देव की कृपा: सूर्य देव का धनु राशि में गोचर सूर्य को शक्तिशाली बनाता है। तर्पण करने से सूर्य, जो कि आत्मा, पिता और स्वास्थ्य के कारक हैं, वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों को शक्ति, यश, मान-सम्मान और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं।

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