वसुंधरा विधायक दल की नेता बनीं

जयपुर| भाषा| पुनः संशोधित शनिवार, 26 फ़रवरी 2011 (19:18 IST)
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के भाजपा विधायक दल ने करीब 18 महीने के अंतराल के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सर्वसम्मति से शनिवार को अपना नेता चुन लिया। हालाँकि बैठक में पार्टी विधायक दल के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी और वरिष्ठ विधायक गुलाबचंद कटारिया अनुपस्थित रहे।

भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल एम. वैंकेया नायडू ने विधायक दल की बैठक में मीडिया की मौजूदगी में वंसुधरा राजे को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुनने की घोषणा की।

बैठक में पार्टी के 78 विधायक और दो निर्दलीय विधायक मौजूद थे। बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री थावरचंद गहलोत, वरिष्ठ नेता कप्तानसिंह, सांसद ओमप्रकाश माथुर और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी मौजूद थे।
नायडू ने कहा कि विधायक नंदलाल मीणा ने विधायक दल नेता के लिए वंसुधरा राजे के नाम का प्रस्ताव किया जिसे काली चरण सर्राफ सहित कई विधायकों ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास करने वाली पार्टी है। हमें आलाकमान ने किसी तरह का निर्देश नहीं दिया है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करते हुए अन्य विधायक से भी इस पद के लिए नाम का प्रस्ताव करने का आग्रह किया, लेकिन किसी विधायक ने कोई और नाम का प्रस्ताव नहीं किया।
नायडू ने बाद में वंसुधरा राजे को सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता चुनने की घोषणा की। निर्वाचन की घोषणा के बाद विधायकों को सम्बोधित करते हुए राजे ने कहा कि मैं आलाकमान और आप सभी को विश्वास दिलाती हूँ कि मैं और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एकजुटता से काम कर कसौटी पर खरा उतरेंगे।

वसुंधरा राजे ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम लिए बिना कहा कि मुझ पर बहुत सारे शब्दों के बाण छोड़े गए, लेकिन मैं डरने वाली नहीं हूँ। इस सरकार को हम नहीं बल्कि जनता हटाएगी। हम आगामी चुनाव जीतेंगे। मैं पूछना चाहती हूँ कि सीएम बार-बार मुंबई क्यों जाते हैं। आजकल छोटा गहलोत भी अजमेर में निकल कर आया है। आजकल तीन लोगों की हर जगह चर्चा है।
राजे ने कहा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार से लोग परेशान हैं, मेरी पूर्व सरकार ने बीमारू राज्य को गड्‍ढे से निकालकर अग्रणी राज्य में ला खड़ा किया, लेकिन दो साल में वह फिर उसी स्थिति में पहुँच गया है। भाजपा सरकार के फिर आने पर मुझे उसी जगह से फिर शुरुआत करनी होगी जिस स्थान से पहले की थी।

उन्होंने विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों से आह्वान किया कि रास्ता लंबा और कठिन है, लेकिन मैं सभी को विश्वास दिलाना चाहती हूँ कि आप सभी का साथ लेकर हम लोगों के आँसुओं को पोंछ पाएँगे। मेरा परिवार राजस्थान की जनता है और उनकी इज्जत को कभी धूल में नहीं मिलने दूँगी। (भाषा)



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