जिलाधीश कृष्णा और इंजीनियर रिहा

सरकार ने माओवादियों की माँगें मानी

भुवनेश्वर| भाषा|
मलकानगिरि के अपहृत जिलाधीश आरवी कृष्णा और कनिष्ठ इंजीनियर पवित्र माँझी को रिहा कदियगयहैमाओवादियों की सभी माँगों को उड़ीसा सरकार द्वारा स्वीकार कर लिए जाने के बाद माओवादियों के वार्ताकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

खबर है कि कृष्णा और माँझी मलकानगिरि के लिए रवाना हो गए हैं। इससे पूर्व माओवादियों द्वारा चुने गए तीन में से एक वार्ताकार प्रोफेसर जी. हरगोपाल ने राज्य सरकार के साथ तीन दिनों से चली आ रही वार्ता के समापन पर कहा था कि मलकानगिरि के जिलाधीश और कनिष्ठ इंजीनियर को 48 घंटों के भीतर रिहा कर दिया जाएगा। राज्य के गृह सचिव यूएन बेहरा ने कहा कि छह दिनों से चला आ रहा बंधक संकट हल कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गंती प्रसादम और शीर्ष नक्सली नेता रामाकृष्णा की पत्नी पद्मा सहित पाँच माओवादियों के खिलाफ मामले वापस लेने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन करने पर सहमत हो गई है।

गृह सचिव बेहरा ने कहा कि सरकार ने इस बात पर भी सहमति जताई है कि जब तक माओवादी गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त नहीं होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने भाकपा (माओवादी) की केन्द्रीय समिति के आशुतोष सेन, श्रीरामुलु श्रीनिवासुलु, गणेशन पात्र और जीवन बोस जैसे नक्सलियों की रिहाई की माँग पर कहा कि इस मामले को गुण-दोष के आधार पर देखा जाएगा।
बेहरा ने कहा कि माओवादियों की आठ माँगों को कल मान लिया गया था, जबकि आज की वार्ता में शेष छह माँगों को स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि मलकानगिरि जिले के चित्रकोंडा इलाके से 17 फरवरी को अपहृत जिले के जिलाधीश आरवी कृष्णा और कनिष्ठ इंजीनियर पवित्र माँझी की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।

माओवादियों ने आरोप लगाया था कि कोरापुट जिले के दामसोल गाँव में सुरक्षाकर्मी आदिवासी सितन्ना हिकोक को अपने साथ ले गए हैं। इस पर उड़ीसा सरकार ने कहा कि उसे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और इस मामले में किसी ने शिकायत दर्ज नहीं कराई है। (भाषा)



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