गिल को ओलिम्पिक पदक की उम्मीद

नई दिल्ली (वार्ता) | वार्ता| Last Updated: बुधवार, 9 जुलाई 2014 (20:13 IST)
खेलमंत्री एमएस गिल ने उम्मीद जताई कि अब से एक महीने बाद बीजिंग में होने वाले 'खेलों के महाकुंभ' ओलिम्पिक में भारतीय निशानेबाजों और महिला रिले टीम से पदक की उम्मीद की जा सकती है।

गिल ने कहा कि हमारे खिलाड़ियों ने ओलिम्पिक के कई खेलों के लिए क्वालीफाई कर लिया है और कई अभी क्वालीफाई कर रहे हैं। मुझे सभी खेलों पर तो भरोसा नहीं है, लेकिन मैं निशानेबाजों और चार गुणा 400 मीटर महिला रिले टीम के अलावा तीरदांजों से उम्मीद कर रहा हूँ।

उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि हमारी रिले टीम की लडकियाँ फाइनल में खेलेंगी और कुछ चमत्कार भी कर दिखाएँगी। निशानेबाजों और तीरंदाजों से भी मुझे पदक की उम्मीद नजर आती हैं। इन खेलों को छोड दिया जाये तो ओलिम्पिक में भारत की भागीदारी को लेकर खेल मंत्री कई बहुत आशावादी नजर नहीं आते हैं।
गिल ने कहा कि ओलिम्पिक में हमारा उद्देश्य सिर्फ अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और अपनी संख्या बने पर रहता है। हम अभी तक यही करते आ रहे हैं और इस तरह के उद्देश्य को लेकर पदक नहीं जीते जा सकते।

गिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमें आम जनता के खेल जैसे फुटबॉल, हॉकी, बास्केटबॉल, वालीबॉल को बढ़ावा देना चाहिए क्योंकि ये ऐसे खेल हैं जो सभी लोग खेल सकते हैं और ऐसे खेलों के लिए बडे आधारभूत ढाँचे की जरूरत नहीं पड़ती है।
उन्होंने कहा कि एथलेटिक्स में तो केवल भागना पडता है। केन्या और अन्य अफ्रीकी देशों ने भाग-भाग कर अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है, जबकि हम वह भी नहीं कर पाए हैं।

खेलमंत्री ने कहा कि हॉकी और फुटबॉल को प्राथमिकता सूची से हटाना एक अविवेकपूर्ण फैसला था। छोटे-मोटे खेल यदि पदक जीत भी लें तो उसका मतलब यह नहीं कि वे बड़े खेल हो गए। बड़े खेल बड़े खेल ही होते हैं, इसलिए खेल मंत्री बनते ही सबसे पहले मैंने इस गलती को सुधारा।
गिल ने साथ ही कहा कि हमारे देश में खेलों को जो समर्थन मिलना चाहिए वह अभी तक नहीं मिला है। खेलों का बजट मौजूदा बजट से दुगुना-तिगुना होना चाहिए, कोचों की संख्या बढनी चाहिए और आधारभूत ढाँचों का विकास होना चाहिए।



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