अमेरिकियों के खातों पर खुफिया नजर

न्यूयॉर्क| WD| पुनः संशोधित शुक्रवार, 15 मार्च 2013 (19:02 IST)
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न्यूयॉर्क। के एक दस्तावेज के मुताबिक ने ऐसी योजनाएं बना रखी हैं जिनके तहत अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को अमेरिकी नागरिकों के वित्तीय आंकड़ों और ऐसे अन्य लोगों के डाटाबेस तक अबाधित पहुँच होगी जो कि अमेरिका में अपने पैसे जमा करते हैं।


प्रस्तावित योजना के तहत अमेरिकी खुफिया एजेंसियां एक बड़ा कदम उठाना चाहती हैं जिसके चलते आतंकी नेटवर्क और क्राइम सिंडीकेट्‍स के वित्तीय स्रोतों की जानकारी जुटा सकें। इसके लिए वित्तीय डाटा बैंक्स, आपराधिक रिकॉर्ड्‍स और सैन्य खुफिया विभाग की सेवाएं ली जाएंगी। कानूनी जानकारों का कहना है कि भले ही इसकी कितनी आलोचना की जाए लेकिन इस योजना को अमेरिकी कानून के अनुसार अनुमति हासिल है।
अमेरिका में काम करने वाले वित्तीय संस्थानों से कहा जाएगा कि वे अपने संदिग्ध ग्राहकों की गतिविधियों की जानकारी दें। ऐसे कामों में बहुत बड़ी राशि के मनी ट्रांसफर्स और असामान्य रूप से बनाए बैंक खातों की जानकारी भी शामिल होगी। यह जानकारी ट्रेजरी की फाइनेंशियल क्राइम्स एन्फोर्समेंट नेटवर्क (फिनसेन) को देनी होगी।

उल्लेखनीय है कि संघीय अन्वेषण ब्यूरो (एफबीआई) को पहले से ही इस बात की छूट है कि वह डाटाबेस में अपनी पहुंच बनाए रखे लेकिन अन्य खुफिया एजेंसियों जैसे सीआईए और नेशनल सिक्यूरिटी एजेंसी को फिनसेन से सूचना पाने के लिए केस दर केस जानकारी देने का आग्रह करना होता है।


इस मामले में अमित कुमार (जो कि डेमोक्रेटिक थिंक टैंक सेंटर फॉर नेशनल पॉलिसी के एक फेलो हैं और जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र से तालिबान पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था) का कहना है कि यह पैसे, भ्रष्टाचार, राजनीतिक रूप से बेनकाब लोगों, एंटी मनी लाउंडरिंग और संगठित अपराध के खिलाफ युद्ध है।



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