पीपल (पिप्पली)

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पिप्पली पाक : पीपर 100 ग्राम लेकर महीन चूर्ण बनाकर कपड़े से छान लें। 2 लीटर गाय के दूध में डालकर इसका मावा बना लें। इस मावे को 100 ग्राम घी में अच्छा गुलाबी होने तक सेकें। आधा किलो शकर की चाशनी बना लें और इसमें मावा मिलाकर थाल में जमा लें। जम जाए तब लगभग 10-10 ग्राम की बर्फी काट लें। सुबह खाली पेट और रात को भोजन के 2 घण्टे बाद, 2-2 बर्फी खूब चबा-चबाकर खाएं और मीठा कुनकुना गर्म दूध घूंट-घूंट करके पीते रहें। इस प्रयोग से पाचन शक्ति प्रबल होती है पेट, साफ रहता है, कब्ज नहीं होने पाती, खूब अच्छी भूख लगती है, हाजमा अच्छा रहता है और इस सबके परिणामस्वरूप शरीर सुडौल और बलवान होता है।


विभिन्न रोग और पीपल
वातश्लेष्म ज्वर : पीपर का काढ़ा आधा-आधा कप सुबह-शाम पीने से वातश्लेष्म ज्वर (बुखार) के अलावा आम वृद्धि और प्लीहा वृद्धि आदि दूर होते हैं।

जीर्ण ज्वर : रोगी को पीपर का आधा-आधा चम्मच चूर्ण गुड़ में सुबह-शाम देना चाहिए। पुराना बुखार टूट जाता है, भूख खुलकर लगने लगती है और पेट ठीक से साफ होने लगता है।

विषम ज्वर : रोगी को सुबह शाम आधा-आधा चम्मच पीपर चूर्ण थोड़े शहद में मिलाकर लेना चाहिए।

उदर वात : पीपर का चूर्ण 1 ग्राम और सेंधा नमक 2 ग्राम, छाछ के साथ दिन में 3 बार लेने से उदर की वायु निकल जाती है और पेट हलका होता है, अच्छा शौच होता है, इससे तबीयत प्रसन्न रहती है।
कफज कास : पीपर को घी में भून लें, फिर पीस-छानकर रख लें। आधा चम्मच यह चूर्ण, 1 ग्राम सेंधा नमक और दो चम्मच शहद तीनों मिलाकर सुबह-शाम लेने से कफज खांसी ठीक होती है। यह चूर्ण आधा चम्मच, गुड़ के साथ लेने से कास-श्वास, अजीर्ण, हृदय रोग, पाण्डु रोग, अग्निमांद्य, कामला, अरुचि और पुराना बुखार आदि रोग ठीक होते हैं।

पेचिश : पीपर के काढ़े को 4-4 चम्मच, बकरी के दूध के साथ, दिन में तीन बार लेना चाहिए। इस प्रयोग से पुरानी पेचिश भी ठीक हो जाती है।
बवासीर : भोजन करने के बाद आधा ग्राम पीपर चूर्ण, 1 ग्राम भुना हुआ पिसा जीरा और जरा सा सेंधा नमक तीनों को मिलाकर, छाछ के साथ, सुबह-शाम दो माह तक लेने से कैसी भी बवासीर हो, ठीक हो जाती है।

दांत निकलना : शिशु के दांत आसानी से निकलें, इसके लिए चुटकीभर पीपर चूर्ण शहद में मिलाकर, इसे शिशु के मसूढ़ों पर लगाकर, दिन में 2-3 बार, घिसना चाहिए। इस उपाय से शिशु के दांत आसानी से निकल आते हैं।
मोटापा : पीपर का चूर्ण आधा चम्मच, थोड़े से शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से 2-3 माह में मोटापा कम होने लगता है।


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