शेखावत ने विद्रोह का बिगुल बजाया

-वेबदुनिया डेस्

ठीक चुनाव से पहले भाजपा में एक बड़ी दरार दिखने लगी है। पार्टी के बुजुर्ग नेता और पूर्व उपराष्ट्रपति व के मुख्यमंत्री रहे ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि वे जनता की इच्छा के कारण चुनाव लड़ेंगे। हालाँकि उन्होंने जोड़ा कि वे तभी ऐसा करेंगे जबकि उनका स्वास्थ्य इसकी अनुमति दे।


बुधवार को ही उनकी ओर से कहा गया था कि राजना‍थ सिंह यह न समझें कि वे भाजपा के प्रत्याशी बनकर ही चुनाव लड़ सकते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने पीएम इन वेटिंग आडवाणी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि पीएम या सीएम के नाम सांसद और विधायक तय करते हैं।


पहले शेखावत को लगभग समझाने के अंदाज में भाजपा प्रमुख राजना‍थ सिंह ने कहा कि जो लोग गंगा नहा चुके हों वे लोग कुएँ में डुबकी नहीं लगाते हैं। उनका इशारा था कि जो लोग संवै‍धानिक पदों पर रह चुके हों उनके लिए सक्रिय राजनीति में वापस लौटना पार्टी की परम्परा नहीं है। राजनाथ ने उन्हें अभिभावक बताया और कहा कि पार्टी उनका सम्मान करती है लेकिन उन्हें टिकट देने पर विचार नहीं करती है।

पर जब शेखावत ने कहा कि वे चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं लेकिन पर यह नहीं कहते कि वह भाजपा से चुनाव लड़ेंगे। इस बयान के बाद से पार्टी के बड़े-बड़े नेता सकते में हैं। पार्टी एक ओर जहाँ आडवाणी को निर्विवाद पसंद बता रही है वहीं पार्टी के कई नेता यह मानते हैं कि आडवाणी को लेकर पार्टी के नेताओं में मतभेद हैं, शेखावत ने इस बात को सार्वजनिक पर दिया है।
आडवाणी समर्थक राजनाथ सिंह और शेखावत के बीच चल रही बयानों की तलवारों से साफ है कि शेखावत की इच्छा के बावजूद पार्टी नहीं चाहती है कि वे सक्रिय राजनीति में लौटें। साथ ही, पार्टी यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि शेखावत आडवाणी के मार्ग में अवरोध न खड़े करें लेकिन शेखावत क्या करना चाहते हैं या क्या करेंगे, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।



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