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Written By भाषा
पुनः संशोधित शुक्रवार, 23 मई 2014 (21:48 IST)

दूतावास हमले में सभी भारतीय स्टाफ सुरक्षित

आईटीबीपी के सुरक्षाकर्मियों ने 4 हमलावरों को मार गिराया

PTI
काबुल-नई दिल्ली। पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात में शुक्रवार तड़के भारतीय वाणिज्य दूतावास पर चार बंदूकधारियों ने हमला किया। हालांकि चारों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया। भारत ने कहा कि ये आतंकी हमला रेखांकित करता है कि अफगानिस्तान की स्थिरता और सुरक्षा को मुख्य खतरा उसकी सीमाओं के पार के आतंकवाद से उत्पन्न होता है।

दो इमारतों वाले परिसर में हमले के समय मौजूद सभी भारतीय राजनयिक स्टाफ और स्थानीय लोग सुरक्षित बच गए। दूतावास पर तैनात आईटीबीपी के सुरक्षाकर्मियों और अफगान सुरक्षाबलों ने हमले को विफल कर दिया।

अफगानिस्तान में भारतीय राजदूत अमर सिन्हा ने बताया कि हमलावरों के पास राकेट ग्रेनेड और मशीन गन थीं। उन्होंने ईरान सीमा से लगे हेरात प्रांत में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर गोलियां बरसानी शुरू कीं। एक हमलावर परिसर में प्रवेश के लिए दीवार पर चढ़ने की कोशिश करते वक्त मारा गया। परिसर में महावाणिज्य दूत का आवास भी है।

हेरात ईरान और अफगान सीमा पर है लेकिन भारत में विश्लेषकों का मानना है कि हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े हो सकते हैं क्योंकि ये ऐसे समय किया गया, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को 26 मई को नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता भेजा गया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस घटना से अफगानिस्तान की मदद करने की उसकी प्रतिबद्धता हल्की नहीं पड़ेगी। प्रवक्ता ने कहा कि सरकार अफगान सरकार के साथ मिलकर हालात का आकलन और समीक्षा कर रही है।

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमारे दूतावास परिसरों पर लगातार ऐसे तत्वों ने हमले किए, जो अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और पुनर्विकास के अफगान जनता के प्रयास का समर्थन नहीं करते हैं। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के हमलों से अफगानिस्तान को उसके पुनर्निर्माण एवं विकास के प्रयासों में मदद की भारत की प्रतिबद्धता हल्की नहीं पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि नेतृत्व ने इस घटना की कड़े शब्दों में निन्दा की है। यह हमला रेखांकित करता है कि अफगानिस्तान और उसकी शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता को मुख्य खतरा उसकी सीमाओं के पार के आतंकवाद से उत्पन्न होता है।

उन्होंने हालांकि ये ब्यौरा नहीं दिया कि जब वह ‘अफगानिस्तान की सीमाओं के पार से’ का जिक्र कर रहे हैं तो उनका इशारा किस देश की ओर है। भारत हेरात प्रांत में कई विकास परियोजनाएं चला रहा है। इनमें सलमा पन बिजली एवं सिंचाई बांध परियोजना शामिल है, जिसकी लागत लगभग 20 करोड़ डॉलर है ।

PTI
इस बीच कैबिनेट सचिव एवं अन्य सचिवों ने हेरात में दूतावास पर हुए हमले से उत्पन्न हालात जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी एजेंसियों के बीच समन्वय के तंत्र की समीक्षा की। बैठक के बाद सभी संबद्ध एजेंसियों को उचित निर्देश दिए गए।

तड़के हुए हमले में पश्चिमी अफगान शहर हेरात (ईरान सीमा के निकट) में भारतीय दूतावास में चार हथियारबंद लोग घुस आए। करीब नौ घंटे की मुठभेड़ के बाद चारों बंदूकधारी मारे गए। सभी राजनयिक स्टाफ सुरक्षित हैं।

ये पूछने पर कि क्या कोई शुरुआती सुराग हाथ लगा है कि हमले के लिए जिम्मेदार कौन है? प्रवक्ता ने कहा कि आकलन और समीक्षा की प्रक्रिया चल रही है। नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण से पहले इस तरह का हमला किया गया तो इसके समय को लेकर भी आकलन किया जा रहा है क्योंकि हेरात के मिशन के बारे में माना जाता है कि वह जलालाबाद और कांधार स्थित भारतीय मिशनों से अधिक सुरक्षित है।

प्रवक्ता ने कहा कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने भावी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात की और आश्वासन दिया कि अफगानिस्तान भारतीय मिशनों की सुरक्षा के लिए हरसंभव कोशिश करेगा।

मोदी ने हमले को विफल करने में अफगान बलों के प्रयासों के लिए करजई का धन्यवाद किया। साथ ही कहा कि भारतीय सुरक्षाकर्मियों और अफगान सुरक्षाबलों ने हेरात में आतंकवादियों से लड़ने में जिस बहादुरी से प्रयास किया, उन प्रयासों को भारत सलाम करता है। अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

अफगानिस्तान से जैसे ही विदेशी सैनिकों (नाटो) ने हटने की योजना बनाई, वहां तालिबान हमले बढ गए। पिछले साल अगस्त में जलालाबाद के भारतीय वाणिज्य दूतावास पर बम विस्फोट किया गया। पाकिस्तान सीमा से सटे इस शहर में हुए इस हमले में छह बच्चों सहित नौ लोग मारे गए थे। कोई भारतीय अधिकारी घायल नहीं हुआ था।

काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर दो बार 2008 और 2009 में हमले किए गए। इनमें 75 लोगों की मौत हुई। सलमा बांध परियोजना के अलावा भारत ने काबुल में अफगान संसद सहित कुछ बडी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश किया है।

अफगानिस्तान के लिए भारत का विकास सहायता कार्यक्रम दो अरब डॉलर का है। इस प्रकार सभी क्षेत्रीय देशों में भारत अफगानिस्तान को सबसे बडी सहायता राशि देने वाला देश है। (भाषा)