एक भले शिक्षक का भला विद्यार्थी

दिलीप विष्णुपं
यहाँ तक की वे कबाड़ भी घर से बाहर नहीं जाने देते। कभी-कभी तो घर के लोग आजिज आ जाते कि यह सब क्या है। अगले चालीस वर्षों में प्रकृति की इस दीवानगी ने गुरुजी को कलागुरु बना दिया। इस बीच धुप्पल में उनका जन्मदिन (जो स्वर्गीय राधाकृष्णन का भी था) शिक्षक दिवस बन गया। छात्रों ने इस दिन छुट्‍टी ही देखी, उस शिक्षक को नहीं देखा। इस गुरुजी ने पूरे जीवन में एक ही मुकम्मिल छात्र तैयार किया जिसका नाम था विष्णु चिंचालकर। आज यह नाम 92 वर्ष का हुआनमस्कार आपको।



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