पागलपन या उन्माद (इंसेंट्री ऑर मेनिया)

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क्या है पागलप

उन्माद रोग कई प्रकार का होता है तथा कई कारणों से हो सकता है। यह रोग प्रायः एकदम न होकर, धीरे-धीरे होता है। भूख न लगना, कब्ज, अग्निमान्द्य, जीभ पर लेप चढ़ जाना, मुँह से दुर्गंध आना, किसी काम में मन न लगना तथा शरीर टूटना- ये लक्षण महीनों पहले दिखाई देने लगते हैं, तत्पश्चात मानसिक भावों में उलटफेर होता है, जिसके कारण रोगी कभी रोता, कभी हँसता, कभी दुःखी हो जाता और कभी प्रलाप करने लगता है।

केश अथवा कपड़े नोचना, अपने को बहुत बड़ा समझना तथा स्त्री प्रसंग की अत्यधिक इच्छा आदि उपसर्ग प्रकट होने के बाद धीरे-धीरे पूरा पागलपन आ जाता है। किसी प्रकार का भ्रम अथवा मिथ्या विश्वास होना, संदेह, कभी चुप रहना और कभी क्रोध में भर जाना आदि विभिन्न लक्षण इन रोगों में प्रकट होते हैं। यही रोग आगे चलकर पुराना भी हो जाता है।

चिकित्सा

स्ट्रैमोनियम 3 एक्स, 6, 30- अत्यधिक क्रोधयुक्त अथवा डरावने उन्माद रोग में यह लाभकर है। काल्पनिक विपत्ति से बचने के लिए इधर-उधर घूमना, अत्यधिक क्रोध, ऊंचे स्वर में गाना, सीटी बजाना, हिंसात्मकता, दांत निकालकर दिखाना, अत्यधिक बकवास, रोशनी तथा साथी की तलाश एवं आत्म गरिमापूर्ण भावों वाली बीमारी में हितकर है। स्मरणीय है कि इस औषध का रोगी प्रकाश तो चाहता है, परन्तु किसी चमकीली वस्तु को देखते ही उसे दौरा भी पड़ जाता है।

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बेलाडोना 1 एक्स, 2 एक्स, 3, 30- तीव्र प्रलाप, आंख की पुतली का फैला होना, भयावनी तथा निश्चल दृष्टि, बीच-बीच में क्रोध करना, नाचना, गाना, तीव्र प्रलाप, समीपस्थ लोगों को काटने अथवा मारने के लिए दौड़ना, सीटी बजाना, उछलकूद करना एवं मानसिक अवस्थाओं में जल्दी-जल्दी परिवर्तन होना- इन लक्षणों में यह औषध लाभ करती है। काल्पनिक दृश्यों को देखकर, भागकर छिप जाने का प्रयत्न करना इसका मुख्य लक्षण है। डॉ. टैलकट के मतानुसार यदि माथा भारी हो तथा सिर में धीमा-धीमा दर्द हो तो इस औषध को 1 एक्स अथवा 2 एक्स के क्रम में देना चाहिए और यदि रोग धातु दोष की उत्तेजना के कारण हो तो 3, 30 क्रम में देना चाहिए।



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