दिल क्‍यों होता है बीमार?

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वह यह कि दिल के दौरे के दौरान मरीज और डॉक्टर दोनों को तत्परता से इलाज के लिए सक्रिय होना पड़ता है। दिल के दौरे के दौरान समय न गँवाते हुए इलाज तत्काल मुहैया कराया जा सके इसलिए डॉक्टर तथा अस्पताल दोनों का चयन महत्वपूर्ण होता है। मरीज और उसके परिजन एंजियोप्लास्टी के लिए निर्णय लेने में देर न करते हुए सहमति दें तो चिकित्सक के लिए आसानी हो जाती है।

भारतीय परिस्थितियों में कई बार सहमति मिलने में देर होती है जिससे मरीज का महत्वपूर्ण समय नष्ट हो जाता है। सहमति के बाद मरीज को ऐसे अस्पताल की जरूरत होती है जहाँ कैथलैब और ट्रेंड स्टाफ उसकी प्रोसीजर करने के लिए हर वक्त मुहैया हो।

कैसे की जाती है प्रायमरी एंजियोप्लास्टी
लोकल एनेस्थिसिया देकर मरीज की बाँह या जाँघ के पास से कैथेटर और वायर डालकर उसकी नसों में आए अवरोधों की एंजियोग्राफी की जाती है। इससे पता चलता है कि अवरोध कहाँ और कितने बड़े हैं। एंजियोग्राफी के साथ ही सीधे टीवी मॉनीटर पर देखते हुए अवरोध को बैलून डालकर खोल दिया जाता है।
एंजियोप्लास्टी की सफलता की दर 90-95 प्रतिशत तक है जबकि दवाओं से केवल 60 प्रतिशत मामलों में अवरोध खोलने में सफलता मिलती है। सफलता की दर मरीज का समय रहते एंजियोप्लास्टी के लिए निर्णय लेने और कुशल चिकित्सक की टीम द्वारा किए गए प्रोसीजर पर निर्भर है। बुजुर्ग मरीजों के मामलों में ऐसे प्रोसीजर आदर्श माने जाते हैं। 90 वर्ष तक के मरीजों पर भी ये प्रोसीजर सफलतापूर्वक किए जा सकते हैं, अतः कहा जा सकता है कि प्रायमरी एंजियोप्लास्टी खून के थक्के हटाने के मामले में सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।



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