विश्व क्षयरोग दिवस आज

टी.बी. : फेफड़ों का रोग

NDND
टी.बी. के लक्षण

* भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।

* बेचैनी एवं सुस्ती छाई रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट रहना व रात में पसीना आना।

* हलका बुखार रहना, हरारत रहना।

* खाँसी आती रहना, खाँसी में बलगम आना तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खाँसी में खून आ जाना।

* गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।

* गहरी साँस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।

* महिलाओं को टेम्प्रेचर के साथ गर्दन जकड़ना, आँ खें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।

* पेट की टी.बी. में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।

* टी.बी. न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खाँसी व छाती में दर्द होता है।

टी.बी. का उपचार

* टी.बी. के उपचार की शुरुआत सीने का एक्स-रे लेकर तथा थूक या बलगम की लेबोरेटरी जाँच कर की जाती है।

* आजकल टी.बी. के उपचार के लिए अलग-अलग एंटीबायोटिक्स/एंटीबेक्टेरियल्स दवाओं का एक साथ प्रयोग किया जाता है। यह उपचार लगातार बिना नागा 6 से 9 महीने तक चलता है।

* इस रोग की दवा लेने में अनियमितता बरतने पर, इसके बैक्टीरिया में दवाई के प्रति प्रतिरोध क्षमता उत्पन्न हो जाती है। इससे बैक्टीरियाओं पर फिर दवा का असर नहीं होता। यह स्थिति रोगी के लिए खतरनाक होती है। एंटीबायोटिक्स ज्यादा प्रकार की देने का कारण भी यही है कि जीवाणुओं में प्रतिरोध क्षमता पैदा न हो जाए।

* उपचार के दौरान रोगी को पौष्टिक आहार मिले, वह शराब-सिगरेट आदि से दूर रहे।

* बच्चों को टी.बी. से बचने के लिए बी.सी.जी. का टीका जन्म के तुरंत बाद लगाया जाता है। अब ये माना जाने लगा है कि बीसीजी के टीके की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

*टीबी की रोकथाम के लिए मरीज के परिवारजनों को भी दवा दी जाती है, ताकि मरीज का इन्फेक्शन बाकी सदस्यों को न लगे जैसे पत्नी, बच्चे व बुजुर्ग अदि। इसके लिए उन्हें आइसोनेक्स की गोली तीन माह तक दी जाती है।

डॉ. अतुल खराटे, अधीक्षक मनोरमा राजे क्षयरोग चिकित्सालय (इंदौर) के अनुसार 'अब 15 दिन पुरानी खाँसी पर ही क्षय रोग का संक्रमण होने की आशंका व्यक्त की जाती है। डॉट्स पद्धति से मरीज इलाज कराता है तो उसे क्षय रोग से मुक्त होने में 10 महीनों से भी कम समय लगता है। शर्त यही है कि दवा नियमित और रोज लेना है। जो लोग अधबीच में दवा खाना छोड़ देते हैं, उनके क्षयरोग के कीटाणु नष्ट नहीं होते बल्कि दवा के प्रति प्रतिरोध उत्पन्न कर लेते हैं।'

जिला क्षय अधिकारी डॉ. विजय छजलानी ने जानकारी दी कि क्षयरोग प्रमुखतः 15-60 वर्ष की आयु में होता है। देश में इस कारण हर साल 12 हजार करोड़ रुपयों की आर्थिक हानि होती है। हर साल लगभग एक लाख से अधिक महिलाओं को क्षय रोग होने के कारण परिवार त्याग देता है। इंदौर जिले में 31 सरकारी प्रयोगशालाओं में खंखार की जाँच होती है। 15 स्वयंसेवी संस्थाएँ इस काम में सहयोग दे रही हैं।

एड्स के बाद सबसे बड़ी जानलेवा बीमारी

WD|
विश्व में हर सेकंड एक व्यक्ति क्षयरोग के शिकंजे में फँस रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व की कुल आबादी में से एक तिहाई सुषुप्त क्षयरोग के संक्रमण की चपेट में है। 24 मार्च विश्वभर में क्षयरोग दिवस के रूप में मनाया जाता है। एचआईवी एड्स के बाद सबसे बड़ी जानलेवा बीमारी क्षयरोग ही है।



और भी पढ़ें :