Last Modified: रायपुर ,
बुधवार, 5 नवंबर 2008 (13:03 IST)
चौथाई वोट पाओ, बनो विधायक
विधायक बनने के लिए किसी विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं के एक चौथाई वोट की भी जरूरत नहीं है। आप 25 फीसदी वोट पाकर भी विधानसभा पहुँच सकते हैं। पिछले चुनाव में एक उम्मीदवार ऐसे थे, जो मात्र 20.5 प्रतिशत वोट हासिल कर विधानसभा पहुँच गए। इसी से विधायकों की विश्वसनीयता और लोकप्रियता का अंदाजा लग सकता है कि कुल डाले गए मतों में से उनके हिस्से में कितने मत आए।
विधायकों की विश्वसनीयता कितनी है, वह भी इस आधार पर कि पिछले चुनाव में उन्हें अपने क्षेत्र से कितने मत प्राप्त हुए। वैसे कभी भी पूरी जनता जिनकी वे नुमाइंदगी करते हैं, वोट नहीं देती, सिर्फ वयस्क मतदाता जो कुल आबादी के 60-65 फीसदी होते हैं, 50 से 60 प्रतिशत ही मतदान करते हैं। यानी कुल आबादी का अधिकतम 40 प्रतिशत हिस्सा (सक्रिय मतदाता) मतदान में हिस्सा लेता है।
छत्तीसगढ़ की जनता इस मामले में सजग है और पिछले चुनाव में मतदान का प्रतिशत 71.30 रहा। प्रजातंत्र में जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की जनता का विश्वास हासिल करके ही विधायिका में आना चाहिए। उनके हिस्से में आए मत, जनता के विश्वास का द्योतक होता है। पिछले चुनाव में विधानसभा में पहुँचने के लिए उम्मीदवारों की जोर-आजमाइश रही है। दो विधायक ऐसे हैं, कुल मतों का 25 फीसदी से भी कम हिस्सा बटोर पाए। इनमें बलौदाबाजार से गणेशशंकर बाजपेयी (कांग्रेस) मात्र 20.51 प्रतिशत मत हासिल कर विधानसभा पहुँचे।
उन्होंने भाजपा के विपीन बिहारी वर्मा को हराया, जिन्हें 20.24 प्रतिशत मत मिले थे। यहाँ एक लाख 56 हजार मतदाताओं में से एक लाख 15 हजार ने मत डाले, जो 73.73 प्रतिशत है। इसी प्रकार सीपत से विधानसभा उपाध्यक्ष बद्रीधर दीवान (भाजपा) भी सिर्फ 23.32 फीसदी मत प्राप्त कर विधायक निर्वाचित हुए। उन्होंने कांग्रेस के रमेश कौशिक को 299 मतों से पराजित किया। क्षेत्र के एक लाख 33 हजार मतदाताओं में से 97 हजार ने मताधिकार का प्रयोग किया, जो 72.85 प्रतिशत है। यानी उस क्षेत्र की आबादी का बहुत कम हिस्से का समर्थन इन विधायकों को प्राप्त है। सक्ती से मेघाराम साहू 28.61 प्रतिशत तथा बसना से डॉ. त्रिविक्रम भोई 29.38 प्रतिशत मत हासिल कर विधयक बने। साहू कृषि मंत्री और भोई संसदीय सचिव हैं।
विधानसभा में 18 विधायक ऐसे भी हैं, जिन्होंने 50 प्रतिशत से ज्यादा मत प्राप्त किया है। 20 विधायकों को 46 से 50 प्रतिशत के बीच वोट मिले। 50 प्रतिशत से अधिक वोट पाने वालों में सिर्फ तीन ही मंत्री है और उनमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। मंत्रिमंडल में तीन ऐसे भी मंत्री हैं, जिन्हें 40 प्रतिशत से भी कम मत मिले हैं। विधानसभा में एक तिहाई विधायक अपने क्षेत्र की कुल जनसंख्या का 16 प्रतिशत से कम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, कयोंकि उनके हिस्से 40 प्रतिशत से कम वोट दर्ज है।
19 विधायक 41 से 45 प्रतिशत, 15 विधायक 36 से 40 प्रतिशत, नौ विधायक 31 से 35 प्रतिशत, दो विधायक 26 से 30 प्रतिशत तथा दो विधायक 25 प्रतिशत से कम वोट पक्ष में कर पाए। राजनीतिक पार्टियों के लिहाज से भाजपा के 15 विधायकों ने 50 से ज्यादा वोट प्राप्त किए हैं, जबकि कांग्रेस के सिर्फ तीन ही विधायक ऐसा कर सके। लोकतंत्र में जनता के विश्वास के नजरिए से इन आँकड़ों को संतोषजनक नहीं माना जा सकता है। (नईदुनिया)