खेल जगत में भारतीय महिलाओं ने अपना लोहा मनवाया

Last Updated: सोमवार, 29 दिसंबर 2014 (20:30 IST)
-सीमान्त सुवीर
 
वक्त कितनी जल्दी पंख लगाकर फुर्र से उड़ता चला जाता है, पता ही नहीं चलता। अब के साल को ही देखिए, वह भी खत्म होने की दहलीज पर आ खड़ा हुआ है। पूरे साल की खेल उपलब्धियों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि इस साल हुए दो बड़े खेल आयोजनों के जरिए भारतीय खिलाड़ियों ने विदेशी जमीं पर बड़ी शान के साथ तिरंगा लहराया है और अपनी ताकत का अहसास पूरी दुनिया को करवाया है। 
 
2014 में भारतीय खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन से यह तो उम्मीद जाग ही गई है कि आने वाले वक्त में ये खिलाड़ी दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को न केवल चुनौती देंगे बल्कि उन पर फतह भी हासिल करेंगे। भारतीय पुरुष खिलाड़ियों के साथ-साथ महिलाओं खिलाड़ियों ने भी पूरी दुनिया को यह दिखा दिया है कि उनकी बाजुओं में लोहा भरा हुआ है। 
 
साइना नेहवाल, तीन बच्चों की मां एमसी मैरीकॉम, विवाहिता सानिया मिर्जा ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से का सिर दुनिया के खेल मंच पर ऊंचा किया है। इन तीनों महिला खिलाड़ियों को पूरे भारत की तरफ से कड़कदार सैल्यूट। 2014 में ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेल और इंचियोन में हुए एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने अपने गले पदक से सजाए। जहां राष्ट्रमंडल खेलों में 15 स्वर्ण, 30 रजत और 19 कांस्य पदक जीते तो एशियाई खेलों में 11 स्वर्ण, 10 रजत समेत भारत कुल 57 पदक जीतने में कामयाब रहा। 
साइना नेहवाल : 'भारत की शटल गर्ल' साइना नेहवाल ने 2014 में 3 अंतरराष्ट्रीय खिताब चाइना ओपन, इंडियन ओपन ग्रैंड प्रिक्स गोल्ड और ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज जीतने में कामयाबी हासिल की। उबेर कप को बैडमिंटन का प्रतिष्ठित टूर्नामेंट माना जाता है और इसमें भारतीय टीम कांस्य पदक जीतने में कामयाब रही। साइना भी इस टीम का हिस्सा थी। 
 
साइना नेहवाल ने पूरे देश में बैडमिंटन के खेल को लोकप्रिय बनाने में महती भूमिका निभाई है। वे अब युवा प्रतिभाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुकी हैं। साइना ने अपनी अंतरराष्ट्रीय कामयाबियों से विश्व बैडमिंटन की रैंकिंग में भी चौथी पायदान हासिल की। हालांकि यह भूलना बेमानी ही होगा कि 2 दिसंबर 2010 और 20 जुलाई 2013 को साइना दुनिया की नंबर दो खिलाड़ी बनने का रुतबा भी हासिल कर चुकी हैं। 
 
2015 का साल भारत की इस 'शटल गर्ल' के लिए और अधिक कामयाबी भरा रहेगा, ऐसा पूरा भरोसा किया जाना इसलिए भी चाहिए कि उन्हें कोर्ट पर यह महारत हासिल हो चुकी है कि चीनी और इंडोनेशियन महिलाओं को किस तरह हराया जाता है। 

 

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