पुष्पा परजिया नारी तू नारायणी चलता तुझसे ही संसार है है नाजुक और सुंदर तू कितनी तुझमें ओजस्विता और सहजता का श्रृंगार है जो हर मुश्किल को सहज बना दे जो हर इंसा की हिम्मत और शक्ति तू प्यार की एक डोर है जो बांध रखे परिवार है जो...