एक आदिवासी लड़की की डायरी

- रंजन के. पांड
एक स्थानीय कार्यकर्ता चौधरी संताकर टुनी की मदद कर रहा था। उसने बताया, 'टुनी ने पूरी तरह से घर संभाल लिया। आखिरकार, दस साल की उम्र में अपने परिवार की आमदनी बढ़ाने के इरादे से वह भी अपने भाई संजीत के साथ मजदूरी करने लगी।'



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