सुनसान जगह पर क्यों नहीं रहना चाहिए?

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हिन्दू पुराणों और वास्तु शास्त्र में कुछ जगहों पर एक सभ्य व्यक्ति को नहीं रहना चाहिए। यदि वह वहां रहता है तो निश्‍चित ही उसके जीवन और भविष्‍य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। घर यह सुकून का नहीं है तो कैसे जीवन में सुकून आएगा। जैसे चौराहे, तिराहे, अवैध गतिविधियों वाली जगह, शोर मचाने वाली दुकान या फैक्ट्री आदि। इन्हीं में से एक है सुनसान इलाका। दरअसल, आप जहां रहते हैं उस स्थान से ही आपका भविष्य तय होता है। यदि आप गलत जगह रह रहे हैं तो अच्छे भविष्य की आशा मत कीजिये। आओ जानते हैं कि क्यों नहीं रहना चाहिए पर।

1. दो तरह के सुनसान होते हैं एक मरघट की शांति वाले और दूसरे एकांत की शांति वाले। कई लोग एकांत में रहना पसंद करते हैं। इसके चलते वे सुनसान में रहने चले जाते हैं। सुनसान जगह पर रहने के कई खतरें हैं और साथ ही शास्त्रों में ऐसी जगहों पर रहने की मनाही है।

2. अनुसार आपका घर नगर या शहर के बाहर नहीं होना चाहिए। गांव या शहर में रहना ही तुलनात्मक रूप से अधिक सुरक्षित होता है।
3. यदि घर बहुत सुनसान स्थान पर या शरह-गांव के बाहर होगा तो जब भी आप घर से बाहर कहीं जाएंगे उस दौरान आपके मन और मस्तिष्‍क में घर-परिवार की चिंता बनी रहेगी।

4. यह तो आप भी जाते होंगे कि सभी सुनसान स्थान पर अपराधी आसानी से अनिष्ट संबंधी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं।

5. दूसरी बात यदि शहर से दूर घर है तो रात-बिरात आने जाने में भी आपको परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, भले ही आपके पास कार या बाइक हो।
6. सुनसान जगहों को राहु और केतु की बुराई का स्थान माना जाता है। यहां पर घटना और दुर्घटना के योग बने रहते हैं।

7. सुनसान जगहों पर नकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक विचार बहुत तेजी से पनपते हैं।

8. जहां अस्पताल, विद्यालय, नदी, तालाब, स्वजन या मनुष्य की आबादी नहीं है वहां पर नहीं रहना चाहिए।




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