मुस्लिम संगठन बोले, कानपुर हिंसा भड़काने में PFI का हाथ

हिमा अग्रवाल| Last Updated: शनिवार, 4 जून 2022 (18:06 IST)
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कानपुर। कानपुर हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तेवर सातवें आसमान पर है, उन्होंने उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए स्थापित प्रशासन को हिदायत दी है कि बवालियों की पहचान के बाद उनके ऊपर गैंगस्टर और रासुका लगाई जायें।

वही कानपुर हिंसा के बाद वेस्ट यूपी में भी अलर्ट जारी किया गया है, सतर्कता की दृष्टि से पुलिस के अधिकारी अपने जिलों में जगह-जगह मीटिंग कर रहे है और संवेदन और अतिसंवेदनशील इलाकों की चौकसी बढ़ा दी गई है। मुस्लिम संगठनों ने कानपुर हिंसा को एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताते हुए को घटना का जिम्मेदार ठहराया है।

इस हिंसा पर सूफी खानकाह एसोसिएशन की तरफ से एक वीडियो में बड़ा बयान सामने आया है, सूफी खान एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी कौसर हसन मजीदी ने कहा है कि कानपुर में अमन चैन की छीनने की कोशिश की गई है, हिन्दुओं-मुसलमानों को लड़ाने की साजिश बेहद शर्मनाक और दर्दनाक है। इस हिंसा के पीछे PFI का हाथ हो सकता है, हिंसा में जिस तरह का पैर्टन यूज किया गया है वह PFI की तरह का है।
उन्होंने कहा कि कानपुर में ने अपने पैर पसार रखे हैं, उनकी गतिविधियां संदिग्ध हैं, समय-समय पर इसकी जानकारी कानपुर स्थानीय प्रशासन की दी जाती रही है। लेकिन प्रशासन ने सूफी खान एसोसिएशन की बात को अनसुना कर दिया, खान एसोसिएशन के पदाधिकारी भी पीएफआई के टारगेट पर है।

कानपुर हिंसा की टाइमिंग और ठेले में पत्थर भर कर लाना, भीड़ में बाहरी लोगों का शामिल होना, ये सब पहले से सुनियोजित होना दर्शाता है। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
हयात जफर हाशमी है मास्टरमाइंड
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मिली जानकारी के मुताबिक कानपुर हिंसा का मास्टरमाइंड हयात जफर हाशमी है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। हयात जफर हाशमी एम एम एस जौहर फैंस एसोशिएशन का अध्यक्ष है और सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहता है, इससे पहले भी वह कई बार लोगों को उकसाकर कानपुर में उपद्रव करवा चुका है। हाशमी को कांग्रेस पार्टी से जुड़ा होने की बात भी सामने आ रही है।
बीते शुक्रवार को कानपुर हिंसा से पहले मौलानाओं ने एक बैठक करते हुए सरकार से नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग की थी। मौलानाओं की अनवर गंज स्थित एक मस्जिद में तकरीर के दौरान हयात जफर हाशमी का शामिल होना भी बताया जा रहा है। हयात जफर की सीएए और एनआरसी प्रदर्शन के दौरान भी उसकी भूमिका संदिग्ध पाई गई थी।

हयात का पुलिस काला चिट्ठा भी तलाश रही है, क्योंकि कुछ वर्ष पहले तक हयात अपने घर में सरकारी राशन की दुकान चलाता था और कुछ वर्षों में उसने काफी सम्पत्ति अर्जित कर ली है। यही नहीं कुछ समय पहले उसने मकान खाली कराने के लिए अपनी मां-बहन को उकसाते हुए कानुपर डीएम कार्यालय में आग लगाने का प्रपंच रचा, जिसके चलते मां-बहन झुलस गई और उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई थी।
कानपुर हिंसा में लगभग 40 लोगों को पुलिस ने चिन्हित करते हुए 1000 अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया है। वही घटना के समय की वीडियो फुटेज और सीसीटीवी फुटेज को पुलिस खंगाल रही है। जिले में शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए 12 कंपनी और एक प्लाटून PAC, RAF,RRF कानपुर में गश्त कर रहे है, वही कुछ तेज तर्रार अधिकारियों को कानपुर में कैंप करने के लिए भेजा गया है।



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