1. भूली बिसरी राम कहानी फिर से अब दोहराए कौन फूल हँसेंगे रोएगी शबनम, ज़ख्म-ए-जिगर दिखलाए कौन मांझी, मौजें, तूफ़ाँ, धारे, सब की नीयत डांवाडोल बीच भंवर से मेरी नय्या तुझबिन पार लगाए कौनदीप, पतंगे, चाँद, चकोरी, तेरे मेरे अफ़साने फूल और भंवरा एक पहेली बूझे कौन बुझाए कौन ममता...