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Last Modified: गुरुवार, 11 सितम्बर 2025 (19:56 IST)

धधकते युद्धों और भू-राजनैतिक तनावों के बीच, वैश्विक सैन्य ख़र्च रिकॉर्ड स्तर पर

World military spending at record level
World military spending at record level: विश्व भर में, सैन्य बलों व शस्त्रों पर किए जाने वाला कुल ख़र्च, पिछले साल अभूतपूर्व ढंग से 2700 अरब डॉलर के आंकड़े को छू गया। यूएन महासचिव ने गहन रूप धारण कर रहे युद्धों और गहराते भू-राजनैतिक तनावों के बीच, बढ़ते सैन्य व्यय और उससे उपजने वाले ख़तरों पर चिन्ता जताई है।
 
यूएन के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को इस विषय में अपनी नई रिपोर्ट जारी की है। उन्होंने न्यूयॉर्क मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दुनिया में फ़िलहाल शान्ति निर्माण के बजाय युद्ध लड़ने में कहीं ज़्यादा ख़र्च हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 के दौरान, विश्व के सभी पांच क्षेत्रों में सुरक्षा आवश्यकताओं पर व्यय बढ़ा है और पिछले तीन दशकों में साल-दर-साल के नज़रिए से इसमें सबसे अधिक उछाल आया है।
 
सैन्य बजट 2.7 ट्रिलियन डॉलर (2,700 अरब डॉलर) पहुंच चुका है, जबकि विश्व भर में अत्यधिक निर्धनता को केवल 300 अरब डॉलर के ज़रिए समाप्त किया जा सकता है। “एक अधिक सुरक्षित विश्व की शुरुआत, निर्धनता से लड़ाई में कम से कम उतने ही निवेश से होगी, जितना हम युद्ध लड़ने में ख़र्च करते हैं।” शस्त्र संबंधी ख़र्च पिछले वर्ष चिन्ताजनक स्तर पर पहुंच गए, जो कि 2024 में यूएन के वार्षिक नियमित बजट का 750 गुणा हैं।
 
सहायता या हथियार : सम्पन्न देशों के समूह (OECD) द्वारा प्रदान की जाने वाली कुल विकास सहायता धनराशि का यह क़रीब 13 गुणा है। यह सैन्य ख़र्च और सतत विकास के बीच चयन के टकराव को दर्शाता है। यूएन प्रमुख ने कहा कि मौजूदा सैन्य ख़र्च के आंशिक हिस्से को भी विकास की दिशा में मोड़े जाने से अहम खाइयों को पाटा जा सकता है। बच्चों को स्कूल भेजना, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मज़बूती देना, स्वच्छ ऊर्जा में विस्तार लाना, बुनियादी ढांचे का निर्माण करना और सर्वाधिक निर्बलों की रक्षा संभव होगी। 
 
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष और एक दशक में सैन्य बलों में जितना निवेश किया गया, उसके छोटे से हिस्से से निम्न और निम्नतर मध्य-आय वाले देशों में हर बच्चे की शिक्षा सुनिश्चित की जा सकती थी। साथ ही, जलवायु अनुकूलन प्रयासों को वित्तीय समर्थन और बाल कुपोषण का ख़ात्मा भी हो सकता था, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय, टिकाऊ विकास लक्ष्यों को साकार करने के नज़दीक पहुंच जाती।
 
निरस्त्रीकरण मामलों के लिए यूएन प्रमुख इज़ूमी नाकामित्सु ने पत्रकार वार्ता में कहा कि वैश्विक प्राथमिकताओं में फिर से सन्तुलन क़ायम करना, विकल्प नहीं है। यह मानवता को बचाने के लिए अनिवार्य है।
 
टिकाऊ विकास पर जोखिम : यूएन प्रमुख ने बताया कि फ़िलहाल सतत विकास एजेंडा के क़रीब 20 फ़ीसदी लक्ष्य ही साकार होने की दिशा में बढ़ रहा है और टिकाऊ विकास का वादा जोखिम में है। सैन्य बलों पर जहां और अधिक मात्रा में ख़र्च किया जा रहा है, सामाजिक निवेश, निर्धनता उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे में कम व्यय हो रहा है।
 
इस वजह से, टिकाऊ विकास के सभी लक्ष्यों पर प्रगति में रुकावट आई है। यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि जब आम नागरिकों के जीवन में बेहतरी आती है, तभी शान्तिपूर्ण समाजों व शान्तिपूर्ण विश्व को आकार दिया जा सकता है।
 
नया सुरक्षा दृष्टिकोण : उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आम लोगों में किया गया निवेश, किसी भी समाज में हिंसा के विरुद्ध रक्षा की पहली पंक्ति में निवेश है। मंगलवार को जारी रिपोर्ट में मानव-केन्द्रित और बहुआयामी दृष्टिकोण को अपनाने पर बल दिया गया है, जिसमें कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्राथमिकता दी जाए और सतत विकास का मार्ग प्रशस्त हो।
 
यूएन रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक अवसरों के अभाव, निर्धनता, और अल्पविकास की वजह से अस्थिरता पनपती है, हिंसा को ईंधन मिलता है और सैन्य व्यय में उछाल आता है। इसके मद्देनज़र, महासचिव ने कहा कि विकास और सतत सुरक्षा में निवेश के ज़रिए, हथियारों के लिए होड़ को रोका जा सकता है और सैन्य ख़र्च की मजबूरी से ही उबरा जा सकता है।
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