शिकारी तो ये समझे थे
वो अपने क़ूव्वत-ए-बाज़ू से पिंजरा भी उड़ा लाया
शिकारी तो ये समझे थे परिन्दा ज़ेर-ए-दाम आया------- कामिल बेहज़ादी
क़ूव्वत-ए-बाज़ू----------बाज़ूओं की ताक़त
ज़ेर-ए-दाम आना---------जाल में फँसना
शिकारी तो ये समझे थे परिन्दा ज़ेर-ए-दाम आया------- कामिल बेहज़ादी
क़ूव्वत-ए-बाज़ू----------बाज़ूओं की ताक़त
ज़ेर-ए-दाम आना---------जाल में फँसना
