ज़ख़्म खा के भी हमको तो
ग़मों की भीड़ में आँसू किसे बहाना है,
के ज़ख़्म खा के भी हमको तो मुस्कुराना है - अज़ीज़ अंसारी
के ज़ख़्म खा के भी हमको तो मुस्कुराना है - अज़ीज़ अंसारी
