बैंक निफ्टी पर सेबी का सख्त नजर, रिटेल निवेशकों को होगा फायदा
Sebi Bank Nifty : अभी हाल में जेन स्ट्रीट कंपनी का बैंक निफ्टी के ऑपशंस में 30 से 35 हजार करोड़ का घोटाला सामने आया था। इस पर सेबी ने कंपनी पर 4,000 करोड़ रुपए की पेनल्टी लगाई थी। सेबी ने कुछ दिन पहले रिटेल निवेशकों के हित में एक्सचेंजों से रिबैलेंसिंग के लिए कहा था। इसी के बाद बैंक निफ्टी पर शिकंजे की पटकथा लिखी गई।
सेबी ने एनएसई से कहा है कि बैंक निफ्टी का इंडेक्स बहुत अनबैलेंसिंग है। इसे रिबैलेंस किया जाएग। कई बार देखने में आता है कि एक्सपायरी वाले दिन बैंक निफ्टी वाले कॉल या पुट जो 10 रुपए वाला है, 200 रुपए पर पहुंच जाता है। कई बार 200 रुपए वाले प्रीमियम वाली चीज 10 रुपए पर आ जाती है। इसकी वजह बड़े प्लेयरों द्वारा किया गया मैनिपुलेशन भी है।
क्या है मामला : शेयर बाजार एक्सपर्ट योगेश बागौरा ने बताया कि बैंक निफ्टी के 2 बड़े स्टाक्स आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक का 35-35 प्रतिशत का वैटेज है। इन दोनों कंपनियों के शेयरों का वैटेज ही 70 फीसदी हो गया। उन्होंने कहा कि बड़े प्लेयर अपने अंदर मैनिपुलेशन करते हैं इससे बैंक निफ्टी की कॉल मैनिपुलेट हो जाती है। इस तरह का गेम काफी समय से चल रहा था। इसे सेबी ने मार्क किया।
सेबी ने क्या कदम उठाया : उन्होंने कहा कि सेबी ने बड़ा बदलाव करते हुए बैंक निफ्टी में 12 की जगह 14 स्टॉक्स का फैसला किया है। किसी भी एक स्टॉक की वैल्यूएशन 20 फीसदी से ज्यादा नहीं होगी। किसी भी टॉप 3 कंपनियों के शेयरों की कुल हिस्सेदारी 45 फीसदी से ज्यादा नहीं होगी। इस वजह बड़े प्लेयर्स के लिए मैनिपुलेशन करना इतना आसान नहीं होगा।
सेबी ने ट्रेडर्स के लिए इंट्राडे डेरिवेटिव पोजिशन पर लिमिट लगाने का भी फैसला किया है। इसके तहत, सेबी ने इंडेक्स ऑप्शंस के लिए इंट्राडे नेट पोजीशन की लिमिट को पहले के 1500 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5,000 करोड़ प्रति इकाई कर दिया है। यह नियम 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो जाएगा। सेबी का कहना है कि कुछ टेडर्स लेवरेज लेकर बड़ी पोजिशन बना लेते हैं इससे बाजार में जोखिम और अस्थिरता बढ़ जाती है।
क्या होगा असर : सेबी के इस कदम से रिटेल निवेशकों को थोड़ी राहत मिलेगी और मैनिपुलेशन की घटनाओं में भी कमी आएगी। यह निर्णय रिटेल निवेशकों के हित में है।
edited by : Nrapendra Gupta
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