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Last Updated: बुधवार, 23 फ़रवरी 2022 (19:20 IST)

शिव नवरात्रि के दूसरे दिन भगवान महाकाल ने शेषनाग धारण कर भक्तों को दिए दर्शन

mahakal sheshnag darshan
उज्जैन। महाशिवरात्रि से पूर्व उज्जैन में शिव नवरात्रि का प्रारंभ 21 फरवरी से हुआ। उज्जैन में शिव नौ दिवसीय पार्वती विवाह महोत्सव मनाया जाता है। नौ दिवस में उपासना, तपस्या एवं साधना के लिए शिव नवरात्रि महापर्व मनाया जाता है। इन नौ दिनों तक भगवान श्री महाकाल अपने भक्तों को अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देकर उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। प्रथम दिन श्री चन्द्रमौलेश्‍वर रूप में महाकाल बाबा ने दर्शन दिए और दूसरे दिन शेषनाग का रूप धारण किया।
 
 
शिव नवरात्रि के दूसरे दिन सायं पूजन के पश्चात भगवान महाकाल ने शेषनाग धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। इसके पूर्व प्रातः शासकीय पुजारी श्री घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राम्‍हणों द्वारा श्री महाकालेश्वर भगवान का अभिषेक एकादश-एकादशनी रूद्रपाठ से किया गया।

सायं पूजन के पश्चात श्री महाकाल को नवीन लाल रंग के वस्त्र धारण करवाए गए। साथ ही भगवान श्री महाकालेश्‍वर को मुकुट, मुण्ड माला एवं फलों की माला के साथ शेषनाग धारण करवाया गया।
 
आज बुधवार 23 फरवरी को श्री महाकालेश्‍वर भगवान श्री घटाटोप के स्‍वरूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देगें।
 
Shiv navratri
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रागंण में 21 फरवरी से शिवनवरात्रि निमित्त सन् 1909 से कानडकर परिवार, इन्दौर द्वारा वंशपरम्परानुगत हरिकीर्तन की सेवा दी जा रही है, इसी तारतम्य में कथारत्न हरि भक्त परायण पं. श्री रमेश कानडकर जी के शिव कथा, हरि कीर्तन का आयोजन सायं 04 से 06 बजे तक मन्दिर परिसर में नवग्रह मन्दिर के पास संगमरमर के चबूतरे पर हुआ।
 
मंदिर प्रशासक श्री गणेश कुमार धाकड़ ने मन्दिर अधिकारी गण व अन्य स्टाफ के साथ शिवरात्रि के प्रस्तावित मार्ग, विभन्न कॉउंटर, पेयजल व्यवस्था आदि के प्रस्तवित स्थान का निरीक्षण किया।
 
उल्लेखनीय है कि प्रथम दिन विधिवत पूजन-अर्चन कर भगवान श्री महाकाल को नवीन वस्‍त्र धारण कर श्रृंगारित किया गया। नौ दिन पूर्व से शिव नवरात्रि उत्‍सव मनाया जाना प्रारंभ हो गया है। प्रथम दिन नैवेद्य कक्ष में श्री चन्द्रमौलेश्‍वर भगवान की पूजा, कोटितीर्थ पर स्थित श्री कोटेश्‍वर महादेव का पूजन-अर्चन करने के बाद प्रारम्‍भ हुआ। प्रात: लगभग 9.30 बजे मुख्‍य पुजारी पं. घनश्याम शर्मा के आचार्यत्‍व में तथा अन्य 11 ब्राह्मणों के द्वारा देश एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना के साथ रूद्राभिषेक प्रारम्भ किया गया। इसके बाद अपराह्न में 3 बजे पूजन के पश्चात भगवान श्री महाकाल को नवीन वस्त्र धारण कर श्रृंगारित कर पूजा-अर्चना की गई।
 
 
- जन संपर्क कक्ष, श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन