शकुनि मामा थे कौरवों के दुश्मन!

अनिरुद्ध जोशी| Last Updated: मंगलवार, 12 जून 2018 (17:28 IST)
गांधारी ने भी दुखपूर्वक आजीवन आंखों पर पट्टी बांधे रखने की प्रतिज्ञा की। गांधारी से महाराज धृतराष्ट्र को 100 पुत्रों की प्राप्ति हुई थी, जो आगे चलकर कौरवों के नाम से प्रसिद्ध हुए। हालांकि वे कौरव नहीं थे।

माना जाता है कि गांधारी का विवाह महाराज धृतराष्ट्र से करने से पहले ज्योतिषियों ने सलाह दी कि गांधारी के पहले विवाह पर संकट है अत: इसका पहला विवाह किसी ओर से कर दीजिए, फिर धृतराष्ट्र से करें। इसके लिए ज्योतिषियों के कहने पर गांधारी का विवाह एक बकरे से करवाया गया था। बाद में उस बकरे की बलि दे दी गई।

कहा जाता है कि गांधारी को किसी प्रकार के प्रकोप से मुक्त करवाने के लिए ही ज्योतिषियों ने यह सुझाव दिया था। इस कारणवश गांधारी प्रतीक रूप में विधवा मान ली गईं और बाद में उनका विवाह धृतराष्ट्र से कर दिया गया। ऐसा क्यों किया इसके पीछे और भी कारण थे।
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