क्या कहता है पुराण प्रलय के बारे में, जानिए रहस्य

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
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कब होगी सृष्टि में : समय का सबसे छोटा मापन तृसरेणु होता है। उससे बड़ा त्रुटि। उससे बड़ा वेध। उससे बड़ा लावा। उससे बड़ा निमेष। उससे बड़ा क्षण। उससे बड़ा काष्ठा। उससे बड़ा लघु। उससे बड़ा दण्ड। उससे बड़ा मुहूर्त। उससे बड़ा याम। उससे बड़ा प्रहर। प्रहर से बड़ा दिवस। दिवस से बड़ा अहोरात्रम। उससे बड़ा पक्ष (कृष्ण पक्ष, शुक्ल पक्ष)। पक्ष से बड़ा मास। दो मास मिलकर एक ऋतु। ऋतु से बड़ा अयन। अयन से बड़ा वर्ष। वर्ष से बड़ा दिव्य वर्ष (देवताओं का वर्ष)। उससे बड़ा युग। चार युग मिलाकर महायुग। महायुग से बढ़ा मन्वन्तर। उससे भी बढ़ा कल्प और सबसे बड़ा ब्रह्मा का दिन और आयु।
प्रत्येक कल्प के अंत में एक प्रलय होता है, जबकि धरती पर से जीवन समाप्त हो जाता है। एक कल्प को चार अरब बत्तीस करोड़ मानव वर्षों के बराबर का माना गया है। यह ब्रह्मा के एक दिवस या एक सहस्र महायुग (चार युगों के अनेक चक्र) के बराबर होता है। आधुनिक वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड की आयु अनुमानत: तेरह अरब वर्ष बताई है। चार अरब वर्ष पूर्व जीवन की उत्पत्ति मानी गई है। दो कल्पों को मिलाकर ब्रह्मा की एक दिवस और रात्रि मानी गई है। यानी 259,200,000,000 वर्ष। ब्रह्मा के बारह मास से उनका एक वर्ष बनता है और सौ वर्ष ब्रह्मा की आयु होती है।
 
इसे इस तरह भी समझा जा सकता है-
मनुष्य का एक मास, पितरों का एक दिन रात। मनुष्य का एक वर्ष देवता का एक दिन रात। मनुष्य के 30 वर्ष देवता का एक मास। मनुष्य के 360 वर्ष देवता का एक वर्ष (दिव्य वर्ष)। मनुष्य के 432000 वर्ष। देवताओं के 1200 दिव्य वर्ष अर्थात एक कलियु। मनुष्य के 864000 वर्ष देवताओं के 2400 दिव्य वर्ष अर्थात एक द्वापर युग। मनुष्य के 1296000 वर्ष देवताओं के 3600 दिव्य वर्ष अर्थात 1 त्रेता युग। मनुष्य के 1728000 वर्ष अर्थात देवताओं के 4800 दिव्य वर्ष अर्थात एक सतयुग। इस सबका कुल योग मानव के 4320000 वर्ष अर्थात 12000 दिव्य वर्ष अथात एक महायुग या एक चतुर्युगी चक्र। 
 
इसी प्रकार 71 युगों का एक मनवन्तर होता है जिसका मान 306720000 मानव वर्ष होता है। प्रत्येक मनवंतर के अंत में सतयुग के बराब अर्थात 1728000 वर्ष की संध्या होती है। एक मनवन्तर के मान 306720000 वर्ष में संध्या के मान 728000 वर्ष के योग करने पर 308448000 मानव वर्ष होते हैं, जो संधि सहित एक मनवन्तर के मानव वर्ष है। अर्थात संधियुक्त एक मनवन्तर में 308448000 वर्ष होते हैं। ऐसे ही जब 14 मनवन्तर व्यतीय होते हैं तब एक कल्प पूरा होता है। यही एक कल्प ब्रह्माजी के एक दिन के बराबर होता है।
 
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