क्या था बालि की शक्ति का राज, जानिए

ऋष्यमूक राम-लक्ष्मण समेत बालि से युद्ध करने गया। के ललकारने पर बालि निकल आया तथा उसने सुग्रीव को मार भगाया। सुग्रीव ने बहुत दुखी होकर से पूछा कि उसने बालि को मारा क्यों नहीं? राम के यह बताने पर कि दोनों भाई एक-से लग रहे थे, अत: राम को यह भय रहा कि कहीं बाण सुग्रीव को न लग जाए। राम ने सुग्रीव को गजपुष्पी लता पहनकर फिर से युद्ध के लिए प्रेरित किया। बालि ने जब फिर से सुग्रीव की ललकार सुनी और लड़ने के लिए बाहर निकला तब तारा ने बहुत मना किया, पर वह नहीं माना। युद्ध में जब सुग्रीव कुछ दुर्बल पड़ने लगा तो पेड़ों के झुरमुट में छिपे राम ने बालि को अपने बाण से मार डाला।

भगवान श्रीराम ने एक ही बाण से बालि का वध करके सुग्रीव को निर्भय कर दिया। बालि के मरने पर सुग्रीव किष्किंधा का राजा बना और अंगद को युवराज पद मिला। तदनंतर सुग्रीव ने असंख्य वानरों को सीताजी की खोज में भेजा।



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