क्या था बालि की शक्ति का राज, जानिए

मायावी का वध : स्त्री के कारण ही बालि का दुंदुभि के भाई मायावी से बैर हो गया। एक बार अर्धरात्रि में किष्किंधा के द्वार पर आकर दुंदुभि के भाई मायावी ने बालि को युद्ध के लिए ललकारा। बालि तथा उससे लड़ने के लिए गए। दोनों को आता देखकर मायावी वन की ओर भागा तथा एक गुफा में छिप गया। बालि सुग्रीव को गुफा के पास खड़ा करके स्वयं गुफा में घुस गया।

सुग्रीव ने 1 वर्ष तक बालि के बाहर आने की प्रतीक्षा की। 1 वर्ष बाद गुफा से रक्त की धारा बहती देखकर सुग्रीव ने यह समझा कि बालि मारा गया। तब उसने गुफा को एक पर्वत के शिखर से ढंका और चला गया। बाद में सुग्रीव ने मंत्रियों के आग्रह पर राज्य को संभाल लिया।

उधर बालि ने गुफा के अंदर मायावी को 1 वर्ष में ढूंढ निकाला। उसने मायावी का वध किया और जब वह बाहर लौटकर आया तो गुफा पर रखे पर्वत शिखर को देखकर उसने सुग्रीव को आवाज दी, किंतु उसे कोई उत्तर नहीं मिला। बालि जैसे-तैसे शिखर को हटाकर अपनी नगरी में पहुंचा। जब वहां उसने अपने भाई सुग्रीव को राज्य करते देखा, तब उसे शंका हुई कि सुग्रीव ने राज्य के लोभ के कारण ही यह सब प्रपंच रचा होगा।
उसने सुग्रीव पर प्राणघातक प्रहार किया। प्राणरक्षा के लिए सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत पर जाकर छिप गया। बालि ने सुग्रीव का धन-स्त्री आदि सब कुछ छीन लिया। धन-स्त्री का हरण होने पर सुग्रीव दु:खी होकर अपने हनुमान आदि 4 मंत्रियों के साथ ऋष्यमूक पर्वत पर रहने लगा।

रावण मारना चाहता था बालि को, लेकिन...




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