गरुड़ पुराण की 7 बातें याद रखेंगे तो कभी मात नहीं खाएंगे..

संयम और सतर्कता : जिंदगी है तो मित्र भी हैं और शत्रु भी। कहते हैं कि जिसका कोई शत्रु नहीं वह अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर रहा है। ऐसे में उसका कोई मित्र भी नहीं होता। इसका यह मतलब नहीं कि हम जानबूझकर लोगों को शत्रु बनाएं। यदि हम अपने तरीके से जी रहे हैं तो निश्चित ही शत्रु बनना स्वाभाविक है।
शत्रु या दुश्मन में से कुछ सामान्य होते हैं और कुछ खतरनाक। अर्थात ऐसा शत्रु जो दिल पर ले लेला है। जिंदगी को हल्के फुल्के में नहीं लेते हैं। अब ऐसे शत्रुओं से चतुराई से शत्रु बचना होता है अन्यथा वह कब, कहां और कैसे आपको चोट देने इसका कोई भरोसा नहीं।
 
के नितिसार में कहा गया है कि शत्रुओं से निपटने के लिए सतर्कता और चतुरता सहारा लेना चाहिए। शत्रु लगातार हमें नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते रहते हैं। ऐसे में यदि हम चतुरता नहीं दिखाएंगे तो नुकसान उठाएंगे। इसलिए जैसा शत्रु है, उसके अनुसार नीति का उपयोग करके उसे काबू में रखा जाना चाहिए।



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