काम की ये 12 रहस्यमय बातें, जानकर चौंक जाएंगे आप

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
परकाय प्रवेश : बंधन के शिथिल हो जाने पर और संयम द्वारा चित्त के प्रवेश निर्गम मार्ग नाड़ी के ज्ञान से चित्त दूसरे के शरीर में प्रवेश करने की सिद्धि प्राप्त कर लेता है। यह बहुत आसान है। चित्त की स्थिरता से सूक्ष्म शरीर में होने का अहसास बढ़ता है। सूक्ष्म शरीर के निरंतर अहसास से स्थूल शरीर से बाहर निकलने की इच्‍छा होती है।
शरीर से बाहर मन की स्वाभाविक वृत्ति है। उसका नाम 'महाविदेह' धारणा है। उसके द्वारा प्रकाश के आवरण का नाश हो जाता है। स्थूल शरीर से शरीर के आश्रय की अपेक्षा न रखने वाली जो मन की वृत्ति है उसे 'महाविदेह' कहते हैं। उसी से ही अहंकार का वेग दूर होता है। उस वृत्ति में जो योगी संयम करता है, उससे प्रकाश का ढंकना दूर हो जाता है।



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