मंगलवार, 27 फ़रवरी 2024
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जगन्नाथ पुरी मंदिर के ध्वज के 10 चमत्कारिक रहस्य

Jagannath Flag | जगन्नाथ पुरी मंदिर के ध्वज के 10 चमत्कारिक रहस्य
महाभारत में नक्षत्र युक्त चंद्र ध्वज युधिष्ठिर के रथ पर लहराता था जबकि श्रीकृष्‍ण अर्जुन के रथ पर गरुढ़ ध्वज लहराता था। श्री जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगे ध्वज पर अर्धचंद्र बना हुआ है और जिसके साथ एक सितारा भी है। आओ जाते हैं इस ध्वज का रहस्य।
 
 
1. श्री जगन्नाथ मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है।
 
2. यह ध्वज लाल और केसरिया रंग का होता है।
 
3. इस ध्वज पर शिवजी का चंद्र बना हुआ है।
 
4. प्रतिदिन सायंकाल मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज को मानव द्वारा उल्टा चढ़कर बदला जाता है। 
 
5. ध्वज भी इतना भव्य है कि जब यह लहराता है तो इसे सब देखते ही रह जाते हैं।
 
6. शिखर पर कई ध्वज लगाए जाते हैं जिसमें मुख्‍य ध्वज को 'पतित पावन बाना' कहा जाता है।
 
7. मुख्य ध्वज के नीचे की और लहराने वाली पताका को 'मानसिक बाना' कहते हैं। इस ध्वज को श्रद्धालु द्वारा भेंट किया जाता है।
 
8. श्री मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर ध्वज हर दिन शाम 4 से 5 बजे के बीच बदला जाता है। ऐसी मान्यता है कि यदि ध्वज एक दिन भी नहीं बदला गया तो मंदिर 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा।
 
9. ध्वज के पास सुदरर्शन चक्र लगा है ध्वज विशालकाय सुदर्शन चक्र के उपर तक लहराता है।
 
10. इस 20 मीटर लंबे ध्वज को 800 साल से चोला परिवार ही बदलता आ रहा है। 
 
11. जगन्नाथ यात्रा में रथ पर लहराने वाले श्रीकृष्ण के ध्वज को कपि ध्वज, बलराम के ध्वज को तालध्वज, सुभद्रा के ध्वज को देवदलन ध्वज कहते हैं।