प.बंगाल 2010 : वाम मोर्चे को झटका

भाषा|
पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष विधानसभा चुनावों के मद्देनजर निकाय चुनावों में माकपा की जबर्दस्त पराजय, तृणमूल की सफलता तथा माकपा के सबसे कद्दावर नेता ज्योति बसु के निधन के अलावा सत्ताधारी वाम मोर्चा और विपक्षी तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें इस वर्ष की प्रमुख सुर्खिया रहीं।

बसु का इस वर्ष 17 जनवरी को 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका निधन पार्टी के लिए बहुत बड़ी क्षति थी। तृणमूल कांग्रेस ने जीत का सिलसिला जारी रखते हुए कोलकाता नगर निगम चुनावों में माकपा को परास्त करने के साथ ही पूरे राज्य के 80 नगर निकाय चुनावों में सबसे सफल पार्टी के रूप में उभरी।

मई 2008 में पंचायत चुनावों में सफलता के बाद 30 मई को हुए इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस समर्थित लहर एक बार फिर दिखाई दी। इसके साथ ही इस वर्ष माकपा और तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच संघर्ष की घटनाएँ सामने आई।
राज्य के दक्षिणी क्षेत्र स्थित मंगोलकोट, ननूर, खेजुरी, नंदीग्राम, सशान और केटूग्राम में माकपा और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं। इसके कारण राज्यपाल और केंद्र सरकार ने चिंता जताई।

राज्य के नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों ने बड़ी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या की। मई 2009 के बाद से हुई राजनीतिक हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए हैं। वर्ष के अंत तक माकपा और तृणमूल कांग्रेस के छात्र शाखाओं से जुड़े सदस्यों के बीच झड़पे शहर की सड़कों तक पहुँच गई।
इस हिंसा में एक छात्र की मौत हो गई, एक की आँख की रोशनी चली गई और कई घायल हो गए। इस वर्ष तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में माओवादियों के खिलाफ केंद्र-राज्य के संयुक्त अभियान को समाप्त करने की माँग काफी जोर-शोर से उठाई लेकिन केंद्र ने स्पष्ट कर दिया कि वह यह माँग नहीं मानेगी।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने यहाँ तक कह दिया कि यदि वह यह साबित नहीं कर पायी कि माकपा राज्य में माओवादी निरोधक अभियान के लिए लाए गए केंद्रीय बलों का दुरुपयोग कर रही है तो वह सरकार से हटने को तैयार हैं। (भाषा)



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