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श्रीफल गणेश

श्रीफल गणेश
कण-कण में समाहित सर्वेश्वर अपने प्रिय भक्तों को विविध रूपों में दर्शन देकर अपनी उपस्थिति का संदेश देते हैं। ऐसी ही एक अनोखी घटना आज से लगभग 24 वर्ष पूर्व 18 सितंबर 1985 को जूनी इंदौर में शनि मंदिर के समीप घटित हुई।

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जूनी इंदौर निवासी ं. मुरलीधर व्यास के अनुसार उस दिन वे रोजाना की भाँति प्रसाद के लिए नारियल फोड़ रहे थे, तभी अचानक उनका हाथ रुक गया। शुभ संकेतों से अंतःप्रेरणा पाकर जब उन्होंने नारियल को ध्यान से देखा तो उसमें गणपतिजी का रूप दिखा।

पंडितजी ने नारियल का विधि-विधान से पूजन किया तथा मंदिर में स्थापित कर दिया। उस समय गणपतिजी की सूँड नहीं निकली थी। इसे पूर्ण रूप से विकसित होने में लगभग 21 वर्ष लगे। आज देश-विदेश के हजारों भक्त श्रीफल गणपति के दर्शन करने दूर-दूर से आते हैं।
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