गणगौर पूजा का अनूठा रिवाज
जहाँ महिलाएँ करती हैं पिटाई
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जी हाँ! देवास जिले के पुंजापुरा गाँव में गणगौर उत्सव के समय एक अनूठी रस्म निभाई जाती है। गाँव में नौ दिनी गणगौर उत्सव मनाया जाता है और फिर अंतिम दिन निभाई जाती है एक अनूठी रस्म।
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गाँव के युवकों की टोली जब खंभे पर बँधे गुड़ को निकालने जाती है तब ये महिलाएँ इनकी खासी पिटाई करती हैं। युवक अपने आपको बचाने के लिए हाथ में लकड़ी की गेंडी लिए हुए रहते हैं। महिलाएँ पिटाई करती रहती हैं और पुरुष खुद को बचाते हुए गुड़ की पोटली नीचे उतारने की कोशिश में जुटे रहते हैं।
यह प्रकिया करीब सात बार दोहराई जाती है। सातों बार महिलाएँ युवकों की धुनाई करती हैं। बाद में युवकों की टोली खंभे को उखाड़ने जाती है तब भी उन्हें मार खाना पड़ती है। फिर गड्ढे को ढँकते समय भी यही रस्म दोहराई जाती है। रस्म समाप्ति के बाद महिला-पुरुष सामूहिक रूप से नाच-गाना करते हैं और महिलाएँ गणगौर माता से अपना सुहाग अक्षत रखने की प्रार्थना करती हैं। फिर माता की मूर्ति को घर-घर घुमाकर गोद भराई की रस्म निभाई जाती है।
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गणगौर माता को खुश करने के लिए किए जाने वाले इस आयोजन में आसपास के गाँवों के कई लोग शरीक होते हैं। गाँव के पुरुषों का मानना है यह रस्म हमें याद दिलाती है कि महिलाएँ भी देवी हैं और उन पर अत्याचार करके हम अपना ही नुकसान कर रहे हैं। इसलिए अपनी गलतियों पर स्वयं को सजा देने के लिए हम इस रिवाज को निभाते हैं। आप इस रस्म के बारे में क्या सोचते हैं, हमें बताइएगा।
