इच्छाधारी नागिन...!
-वेबदुनिया डेस्क
आज तक आपने इच्छाधारी नागिन या नागकन्या का रूप फिल्मों में ही देखा होगा, परंतु आज हम आपको ऐसी इच्छाधारी नागिन से रूबरू कराने जा रहे हैं, जो अपने नाग पति को पाने के लिए इस मृत्युलोक में साधना कर रही है।
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स्वयं नागकन्या होने का दावा करने वाली माया का कहना है कि वह हर 24 घंटे में हवन के दौरान नागिन का रूप धारण कर अपनी तीन बहनों से मिलने जाती है जो उसे अपने नाग पति को पाने के लिए किस तरह साधना की जाए, यह निर्देश देती हैं। माया के मुताबिक ये तीनों बहनें भी इच्छाधारी नागिनें हैं।
खुद को बचपन से शादीशुदा समझने वाली माया नाग के नाम का सिंदूर भरती है और उसे पूरा विश्वास है कि जल्द ही उसके पति के साथ उसका मिलन होगा। माया कहती है कि फिलहाल उसका पति इस मृत्युलोक में उसके परिवार के मोह में फँसा हुआ है और उससे सारी शक्तियाँ छीनी जा चुकी हैं।
अपने पूर्व जन्म की कहानी सुनाते हुए वह कहती है कि द्वापर युग के दौरान वह एक खाई में गिर गई थी तब किसी बाबा ने गोपाल नामक नाग को उसकी मदद के लिए भेजा था, तभी से उन दोनों में प्रेम हो गया था। परंतु शादी न हो पाने की वजह से उसने आत्महत्या कर ली थी। ...और तब से आज तक अपने साथी को पाने के लिए भटक रही है।
नागलोक और मृत्युलोक की अजीबो-गरीब कहानियाँ सुनाने वाली यह इच्छाधारी नागिन माया मध्यप्रदेश के बड़नगर स्थित एक आश्रम में निवास करती है। इन कहानियों से प्रभावित वहाँ के निवासी इनकी महामाया माँ भगवती के रूप में आराधना करते हैं।
लोगों द्वारा माया की पूजा करना आस्था का प्रतीक है या उसका इच्छाधारी नागिन होने के अंधविश्वास का प्रभाव है? आज के इस वैज्ञानिक युग में यह घटना कितनी प्रासंगिक है, अपनी राय से हमें जरूर अवगत कराएँ।
आज तक आपने इच्छाधारी नागिन या नागकन्या का रूप फिल्मों में ही देखा होगा, परंतु आज हम आपको ऐसी इच्छाधारी नागिन से रूबरू कराने जा रहे हैं, जो अपने नाग पति को पाने के लिए इस मृत्युलोक में साधना कर रही है।
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स्वयं नागकन्या होने का दावा करने वाली माया का कहना है कि वह हर 24 घंटे में हवन के दौरान नागिन का रूप धारण कर अपनी तीन बहनों से मिलने जाती है जो उसे अपने नाग पति को पाने के लिए किस तरह साधना की जाए, यह निर्देश देती हैं। माया के मुताबिक ये तीनों बहनें भी इच्छाधारी नागिनें हैं।
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अपने पूर्व जन्म की कहानी सुनाते हुए वह कहती है कि द्वापर युग के दौरान वह एक खाई में गिर गई थी तब किसी बाबा ने गोपाल नामक नाग को उसकी मदद के लिए भेजा था, तभी से उन दोनों में प्रेम हो गया था। परंतु शादी न हो पाने की वजह से उसने आत्महत्या कर ली थी। ...और तब से आज तक अपने साथी को पाने के लिए भटक रही है।
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लोगों द्वारा माया की पूजा करना आस्था का प्रतीक है या उसका इच्छाधारी नागिन होने के अंधविश्वास का प्रभाव है? आज के इस वैज्ञानिक युग में यह घटना कितनी प्रासंगिक है, अपनी राय से हमें जरूर अवगत कराएँ।
