50,000 से कम सब्सक्राइबर वाले यू-ट्यूबर के 'पत्रकारिता' करने पर लगेगा प्रेस एक्ट
अब 50,000 से कम सब्सक्राइबर वाले यू-ट्यूबर के पत्रकारिता करने वाले पर प्रेस एक्ट लगेगा। यह आदेश उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद में अधिकारियों ने जारी किया है। इसे नियमन से ज्यादा सेंसरशिप की कार्रवाई के तौर पर माना जा रहा है। ज़िला सूचना अधिकारी (DIO) नरेंद्र मोहन वर्मा ने इस आदेश की पुष्टि की है। यह कदम स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक संभावित हमले के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है आदेश में
इस आदेश के तहत 50,000 से कम सब्सक्राइबर वाला कोई भी यू-ट्यूबर अगर पत्रकारिता करता हुआ पकड़ा जाता है तो उस पर प्रेस एक्ट के कड़े प्रावधानों के तहत मुक़दमा दर्ज किया जाएगा। यह आदेश प्रभावी रूप से उन स्वतंत्र रचनाकारों द्वारा की जाने वाली ज़मीनी रिपोर्टिंग को अपराधीकरण करता है, जिनके पास बड़े मीडिया घरानों का समर्थन नहीं है। आलोचकों का कहना है कि यह फरमान मानकों को बनाए रखने के बजाय असुविधाजनक आवाजों को चुप कराने के बारे में ज्यादा है।
क्या है एक्ट
प्रेस एवं पत्रिका पंजीकरण अधिनियम, 2023 ने औपनिवेशिक काल के प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867 का स्थान लिया है और इसके अंतर्गत देश में प्रकाशित सभी समाचार पत्रों, पुस्तकों और पत्रिकाओं का पंजीकरण अनिवार्य है। यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि यह अधिनियम YouTube पत्रकारों पर लागू होगा या नहीं, क्योंकि ऐसे प्लेटफ़ॉर्म सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के अंतर्गत आते हैं। हालांकि अधिनियम की "प्रकाशन" की परिभाषा में सभी प्रकाशित सामग्री का इलेक्ट्रॉनिक पुनरुत्पादन शामिल है। Edited by : Sudhir Sharma
लेखक के बारे में
वेबदुनिया न्यूज डेस्क
वेबदुनिया न्यूज़ डेस्क पर हमारे स्ट्रिंगर्स, विश्वसनीय स्रोतों और अनुभवी पत्रकारों द्वारा तैयार की गई ग्राउंड रिपोर्ट्स, स्पेशल रिपोर्ट्स, साक्षात्कार तथा रीयल-टाइम अपडेट्स को वरिष्ठ संपादकों द्वारा सावधानीपूर्वक जांच-परख कर प्रकाशित किया जाता है।....
और पढ़ें