आपबीती : जल्लीकट्टू हिंसा की वजह से भागना पड़ा होटल छोड़कर...
चेन्नई। तमिलनाडु सरकार द्वारा अध्यादेश जारी कर जल्लीकट्टू मनाने की अनुमति देने के बाद भी राज्य में जारी बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है।
सोमवार को शहर के अरुपक्कम इलाके में होटल अमृता के सामने प्रदर्शनकारियों ने जमकर तोड़फोड़ की। देखते ही देखते वहां स्थिति अराजक हो गई। अचानक भड़की हिंसा से होटल में रुके 50-60 लोग स्तब्ध रह गए। पुलिस ने लाठीचार्ज कर किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया।
पिछले दो दिनों से जारी इस हिंसा से प्रदेश में बाहर से आए लोगों की परेशानी उस समय और बढ़ गई जब होटल स्टाफ ने भी मुसीबत की इस घड़ी में उनका साथ छोड़ दिया। होटल में तोड़-फोड़ और आगजनी की आशंका से घबराए स्टाफ ने उन्हें होटल छोड़कर जाने को कह दिया गया। इसके बाद इन गैर तमिलभाषी लोगों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।
इंदौर से दफ्तर के काम से गए अखिलेश पांडे और उनके साथियों ने बताया कि किस तरह सोमवार शाम को जल्लीकट्टू समर्थकों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद अरुपक्कम क्षेत्र में रात को एकाएक हिंसा भड़क उठी और होटल के पास भारी आगजनी और हिंसा होने लगी। अखिलेश बताते हैं कि मुश्किल की इस घड़ी में होटलवालों ने भी हाथ खड़े कर दिए और उन्हें होटल छोड़ कर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी। अखिलेश बताते हैं कि रात में अपना सामान हाथ लिए अनजानी गलियों से भागते हुए हम जैसे-तैसे एक सड़क तक पहुंचे, जहां एक ऑटो वाले ने चेटपेट स्थित उनके दफ्तर तक उन्हें पहुंचाया।
कहा जा रहा है कि रात में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को मरीन बीच पर जाने से रोकने की वजह से प्रदर्शनकारी भड़क गए। स्थिति बेकाबू होते देख पुलिस ने भीड़ पर गोली चलाने के आदेश दे दिए। आज यहां स्थिति बेहतर दिखाई दे रही है। स्कूल-कॉलेज भी खुले हुए हैं।
इस बीच चेन्नई में जल्लीकट्टू को लेकर जारी प्रदर्शनों बीच स्थानीय चैनलों पर प्रसारित एक वीडियो में एक पुलिसकर्मी को एक ऑटो रिक्शा को आग के हवाले करते दिखाया गया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का दावा है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे इस वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है।