Consumers crowd at gas agencies : पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव की खबरों के बीच पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर उत्तर प्रदेश के मेरठ में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। इसी आशंका ने अब घरेलू रसोई तक दस्तक दे दी है। सोशल मीडिया पर फैल रही तरह-तरह की अफवाहों ने लोगों के मन में गैस की किल्लत का डर पैदा कर दिया है। नतीजतन शहर की गैस एजेंसियों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। महिलाएं और पुरुष घंटों लाइन में खड़े होकर बस इस उम्मीद में अपनी बुकिंग कराने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह उन्हें सिलेंडर मिल जाए और घर की रसोई फिर से जल सके।
जब हमारी टीम ने एजेंसियों का हाल जाना तो लोगों की परेशानी साफ दिखाई दी। कई उपभोक्ता नाराजगी और बेबसी के साथ अपनी समस्या बताते नजर आए। गैस कनेक्शन धारक देव शर्मा ने मोबाइल पर मैसेज दिखाते हुए कहा कि उनके फोन में 1 मार्च को गैस डिलीवरी दिख रही है, जबकि उन्हें आज तक सिलेंडर मिला ही नहीं। वे कहते हैं, तीन दिन से घर में खाना नहीं बना।
पड़ोस से चाय-पानी बनकर आ रहा है। गैस एजेंसी के चक्कर लगा रहा हूं। रोज 400 रुपए की दिहाड़ी मिलती है, लेकिन छुट्टी लेनी पड़ रही है। मालिक ने भी कह दिया है- गैस देखो या नौकरी। सिर्फ देव शर्मा ही नहीं, कई उपभोक्ताओं की कहानी लगभग यही है।
सिलेंडर लगभग 3 हजार रुपए का पड़ रहा
कुछ लोगों का कहना है कि अगर उन्हें सिलेंडर तुरंत चाहिए तो ब्लैक में तीन हजार रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं। एक उपभोक्ता ने बताया कि बुकिंग के लिए दो दिन छुट्टी लेनी पड़ी, जिससे करीब दो हजार रुपए की मजदूरी कट गई। ऐसे में 910 रुपए का सिलेंडर उनके लिए लगभग तीन हजार रुपए का पड़ रहा है।
मिनी सिलेंडर 100 से 150 रुपए प्रति किलो
इस बीच गर्मी भी अपना असर दिखाने लगी है और रमजान का महीना चल रहा है। रोज़ेदार महिलाएं और पुरुष भूखे-प्यासे घंटों कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। कई महिलाएं नाराजगी जताते हुए कहती हैं कि सुबह से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अब तक नंबर नहीं आया। घर का सिलेंडर खत्म हो चुका है, इसलिए मजबूरी में मिनी सिलेंडर 100 से 150 रुपए प्रति किलो के हिसाब से भरवाना पड़ रहा है, जो मुश्किल से दो-तीन दिन ही चलता है।
ऑनलाइन बुकिंग की कोशिश करने पर भी कई लोगों को 'सर्वर डाउन' का संदेश मिल रहा है। यही वजह है कि उपभोक्ता सीधे एजेंसियों के दफ्तरों का रुख कर रहे हैं, जहां भीड़ का दबाव साफ देखा जा सकता है। कतार में खड़े कई लोगों ने आरोप लगाया कि गैस की कालाबाजारी हो रही है।
उपले और लकड़ी जलाकर बना रहे भोजन
उनका कहना है कि डिलीवरी करने आने वाले कुछ कर्मचारी बैकडोर से 1800 से 2000 रुपए में सिलेंडर दे रहे हैं और मजबूरी में लोगों को महंगे दामों पर गैस खरीदनी पड़ रही है। इस हालात का सबसे ज्यादा असर निम्न और निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। कुछ लोग इंडक्शन पर खाना बनाने लगे हैं, तो कुछ को उपले और लकड़ी जलाकर भोजन तैयार करना पड़ रहा है।
वहीं गैस एजेंसियों का कहना है कि वे नियमित रूप से बुकिंग भी कर रहे हैं और सिलेंडर भी वितरित कर रहे हैं। एजेंसी संचालकों के मुताबिक कई उपभोक्ता छह महीने या एक साल तक गैस नहीं लेते, लेकिन अचानक आकर तुरंत सिलेंडर की मांग करने लगते हैं। ऐसे में तत्काल सभी को गैस उपलब्ध कराना संभव नहीं होता।
क्या कहता है जिला प्रशासन?
उधर जिला प्रशासन का कहना है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। प्रशासन के अनुसार जिले में तीन प्रमुख कंपनियों (आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल) के लगभग 90 वितरक हैं और सभी के पास पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध है। एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी नहीं होनी चाहिए और वितरण के रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं।
जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने भी लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि जिले में गैस का पर्याप्त भंडार है और निर्धारित समय पर बुकिंग के बाद सिलेंडर मिल रहा है। यदि किसी वितरक द्वारा उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है या गैस की कालाबाजारी की शिकायत मिलती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिन एजेंसियों पर ज्यादा भीड़ की सूचना मिल रही है, वहां भी जांच कराई जा रही है।
इन सबके बीच एक सवाल जरूर उठ रहा है, अगर एजेंसियां उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं, तो आखिर मिनी गैस सिलेंडर आसानी से कैसे रिफिल हो रहे हैं? और डिलीवरी से जुड़े कुछ लोग कैसे सिलेंडर को ब्लैक में बेचने में सफल हो रहे हैं?
गैस की इस अफरातफरी ने न केवल लोगों की रसोई की आग ठंडी कर दी है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि अफवाहें और अव्यवस्था मिलकर आम आदमी की जिंदगी को कितनी मुश्किल बना सकती हैं। ऐसे में जिला प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि आमजन के धीरज और धैर्य को बनाए रखने की, भरोसा दिलाने और व्यवस्था बनाए रखना कि रसोई में गैस चूल्हा ठंडा नहीं होगा, कोई भूखा नहीं सोएगा।
Edited By : Chetan Gour