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नारी जगत का आधार है...। womens day poem

International Womens Day
नारी तू नारायणी
चलता तुझसे ही संसार है 
है नाजुक और सुंदर तू कितनी 
तुझमें ओजस्विता और सहजता का श्रृंगार है 
 
जो हर मुश्किल को सहज बना दे 
जो हर इंसा की हिम्मत और शक्ति 
तू प्यार की एक डोर है जो 
बांध रखे परिवार है 
 
जो धर्म और मर्यादा को संचित करे 
जो असहाय कष्ट सहकर 
देती दुनिया को एक जीव का उपहार है 
 
तू प्यार है, ऐतबार है... 
तू इस जगत का आधार है 
बिन तेरे जहान है सूना 
और तन्हा तू नारी 
नारायणी तू ही जगत का आधार है। 
लेखक के बारे में
पुष्पा परजिया