Hanuman Chalisa

प्रकृति से छिपा लूं बसंत बहार

रेखा भाटिया
यह कैसी बसंत ऋतु दिल पर छाई,
जब कोमल विचारों की बयार बहती आई।
 
सपनों की पंखुड़ियों पर दस्तक दी निंदिया ने,
नीले आकाश तले आरजुएं तितलियों-सी मंडराईं।
 
कोमल-कोमल नभ छूते रहे तमन्नाओं को,
दिल में खुशियां बिछीं वहां हरित कालीन बन।
 
जिन पर हौले-हौले उमंगें पग बढ़ाती आईं,
गुदगुदाती यादें ओंस बनकर सिमट आईं।
 
प्रभात की चमक में वो दमकने लगी दर्पण बन,
जिसमें उभरे अक्स से छेड़छाड़ को उकसाता मन।
 
रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियों-सा अरमानों का कारवां,
गुनगुनाती धूप सेंकता गुजरता हर पल।
 
पक्षियों की चहचहाहट में हजारों गीतों की धुन,
दूर धुंध में उभरता अनुरागी चेहरा।
 
निंदिया पर जब छाई सुहानी बसंत बहार,
दिनभर की थकी प्रतीक्षा के बाद।
 
वक्त को थाम लूं, ठहरा लूं,
फिर कभी अंखियां न खोलना चाहूं।
 
प्रकृति से कहीं छिपा लूं छाई यह बसंत बहार!

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

बारिश में कुछ टेस्टी खाने का है मन? ट्राई करें ये 5 मानसून स्पेशल रेसिपीज

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

क्रिस्टोफ़र नोलन की ‘द ओडिसी’ : होमर के महाकाव्य की उदास सिनेमाई पुनर्रचना

कविता: लाल किला तुझे सलाम

Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध

अगला लेख